
जबलपुर. मेडिकल विश्वविद्यालय अब उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए डिजिटल तरीका अपनाएगा। विश्वविद्यालय परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर प्रोफेसर के ईमेल पर भिजवाएगा। मूल उत्तर पुस्तिका विश्वविद्यालय में ही सुरक्षित रहेगी। इस तरीके से मूल्यांकन में गड़बड़ी रुकेगी, समय पर परीक्षा परिणाम घोषित होगा और मूल्यांकन का खर्च काफी कम हो जाएगा। यह सिस्टम तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय जल्द ही आइटी कंपनी से अनुबंध करेगा। निविदा जारी कर दी गई है। कई कंपनियां प्रेजेंटेशन दे चुकी हैं। प्रस्ताव के तहत कंपनी यूनिवर्सिटी में ही सिस्टम तैयार करेगी। कॉपियों की स्कैनिंग भी कंपनी के कर्मचारी करेंगे। स्कैन कॉपियों को प्रोफेसरों के पास विश्वविद्यालय स्टाफ भेजेगा।
ऐसे होगी जांच
जो प्रोफेसर कॉपी जांचेंगे उनको विवि ईमेल-पासवर्ड देगा। इन्हीं में स्कैन कॉपियां भेजी जाएंगी। जांच के बाद अंक भी एक विशेष फॉरमेट में भरकर ईमेल से ही भेजने होंगे। सॉफ्टवेयर ये नंबर सीधे अंकसूची में दर्ज करेगा।
नए सिस्टम के फायदे
छात्र की मूल उत्तर पुस्तिका
यूनिवर्सिटी में सुरक्षित रहेगी।
कॉपियां भेजने में वाहन, ईंधन, कर्मचारी का व्यय बचेगा।
स्कैन कॉपी तुरंत प्रोफेसर तक पहुंचेगी।
कॉपियों में पेज बदलने/दोबारा लिखने जैसी गड़बड़ी रुकेगी।
कॉपी जांचने के बाद ईमेल पर भेजे अंक सॉफ्टवेयर से सीधे अंकसूची में दर्ज।
जांच जल्दी होगी तो नतीजे शीघ्र आएंगे। परीक्षाएं समय पर होंगी।
फिलहाल यह सिस्टम
- परीक्षा के बाद विवि पहुंची कॉपियों के अलग-अलग बंडल बनवाकर प्रोफेसर्स के पते पर भेजे जाते हैं।
- प्रोफेसर्स तक उत्तर पुस्तिकाओं को पहुंचाने के लिए वाहन, ईंधन सहित कर्मचारियों की आवाजाही पर खर्च होता है।
- कॉपी जांच लिए जाने की सूचना मिलने के बाद फिर से कॉपियों को संकलित किया जाता है।
- केंद्रीय मूल्यांकन होने पर पर बाहर से आने वाले प्रोफेसर के ठहरने-खाने और आने-जाने पर खर्चा होता है।
- कॉपियों को प्रोफेसर्स तक पहुंचाने और जांच के बाद वापस लाने में करीब दो से तीन माह का समय लगता है।
कॉपियां स्कैन करके मूल्यांकनकर्ताओं को जांचने के लिए भेजने का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था बनाने के लिए आइटी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। इससे मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिजल्ट जल्दी घोषित होंगे।
डॉ.आरएस शर्मा, कुलपति, मेडिकल विश्वविद्यालय