एक ओर राजस्व वसूली के लिए नगर निगम शिविर पर शिविर लगा रहा है। ताकि उसका खजाना भर सके। वहीं दूसरी ओर खजाने को संरक्षित व सुरक्षित रखने के बजाये ऐसे कामों में खर्च कर रहा है, जो उसके कर्मचारी स्वयं कर सकते हैं। लेकिन वह कर्मचारियों को आराम देकर, निजी संस्थाओं को लाखों रुपए देकर काम करवा रहा है। नगर निगम द्वारा संचालित नि:शुल्क नल कनेक्शन योजना से निगम को लाखों रुपए की चपत लगनी तय है। निगम सैकड़ों लोगों का स्टाफ होने के बावजूद निजी संस्थाओं की मदद ले रहा है। इसके एवज में संस्थाओं को प्रति आवेदन 29 रुपए और कनेक्शन पर 450 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। एक अप्रैल से चलाए जा रहे इस अभियान में अब तक 30 हजार आवेदन निगम को प्राप्त हो चुके हैं।
निगम द्वारा चलाए जा रहे अभियान में निजी संस्थाओं ने 26 हजार आवेदन भरवाएं हैं। शेष आवेदन निगम कर्मियों के प्रयास से भराए गए। निगम ने प्रति कनेक्शन 29 रुपए की दर से अब तक संस्थाओं को सात लाख 54 हजार रुपए का भुगतान कर चुकी है। वहीं इतने कनेक्शन जोडऩे पर इन संस्थाओं को 450 रुपए की दर से एक करोड़ 17 लाख रुपए मिलेंगे। निगम ने इसके अलावा प्रचार-प्रसार के नाम पर भी चार से पांच लाख रुपए खर्च किए हैं।
निगम को नए कनेक्शन से टैक्स के रूप में शेष बचे छह माह के एवज में लगभग दो ढाई करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त होगा। निगम ने यह अभियान विभाग के कर्मियों की मदद से चलाया होता तो निगम का सवा करोड़ रुपए बच सकता था। निगम के पास हर जोन में पलम्बरों की एक-एक टीम मौजूद है। इसके बावजूद कनेक्शन जोडऩे का काम भी ठेके पर कराया जा रहा है।
मिस्ड कॉल से मिल रहा कनेक्शन
महापौर स्वाति गोडबोले ने शहरवासियों से अपील की है कि वे नि:शुल्क नल कनेक्शन के लिए 7024123900 पर मिस्ड कॉल मारकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। मिस्डकॉल करने वाले के घर निजी संस्था के लोग आवेदन भरवाकर नल कनेक्शन प्रदान करेंगे। यह अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा।
निगम को नि:शुल्क नल कनेक्शन योजना का दीर्घकालीन फायदा मिलेगा। 30 हजार एेसे लोग हैं जो अब तक टैक्स नहीं देते थे। निजी समितियों की मदद से ही यह राशि प्राप्त हो सकी है।