
जबलपुर। गुड्स एंड सर्विस टैक्स के एक प्रावधान ने कारोबारियों के होश उड़ा दिए है। इस नियम के तहत जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी कारोबार करें या नहीं, उसे टैक्स भरना ही होगा। मामला वृत्तिकर (प्रोफेशनल टैक्स) की अदायगी से जुड़ा है। इसमें साल भर व्यापार नहीं करने पर भी वृत्तिकर चुकाना होगा। इस संबंध में वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा हाल ही में व्यापारियों को नोटिस भेजे गए है। जिसके बाद जिले के कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। इसे जमा करने के लिए ३१ मार्च तक का समय दिया गया है। इसी महीने आयकर भी जमा करना है।
टैक्स की राशि फिक्स
वाणिज्यिक कर विभाग ने करीब तीन हजार कारोबारियों को नोटिस भेजे हैं। इसमें तय तिथि तक 25 सौ रुपए प्रोफेशनल टैक्स जमा करने के लिए कहा गया है। प्रदेश शासन की ओर से वृत्तिकर अधिनियम में संशोधन किया है । इसका प्रकाशन राजपत्र भी किया गया है। इसे मध्यप्रदेश वृत्तिकर (संशोधन) अधिनियम, 2017 नाम दिया गया है। इसका प्रकाशन आठ जनवरी को किया गया है। वहीं संशोधन के नियम एक जुलाई १७ से लागू किए गए हैं।
बदल चुका है नियम
वैट या जीएसटी में पंजीकृत कारोबारियों को वृत्तिकर के नए नियम के तहत प्रोफेशनल टैक्स जमा करना पडेग़ा। वृत्तिकर अधिकारी संजय सिंह ने चर्चा में बताया कि वैट एवं जीएसटी के पंजीयन धारकों के लिए 8 जनवरी 2018 के संशोधन अधिनियम के द्वारा बिना किसी स्लैब के आधार पर 25 सौ रुपए वषिक प्रोफेशनल टैक्स जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस परिवर्तन को एक जुलाई 2017 से लागू कर दिया गया है। इससे पहले कारोबारियों से टर्नओवर के आधार पर प्रोफेशनल टैक्स लिया जाता था। इसमें 10 से 50 लाख सालाना कारोबार करने वाले को 2 हजार और 50 लाख से अधिक के टर्नओवर पर २५ सौ रुपए प्रोफेशनल टैक्स देना जरूरी था। जीएसटी के बाद यदि शून्य कारोबार है और कारोबारी ने जीएसटी या वैट में रजिस्टे्रशन लिया है तो उसे 25 सौ रुपए कर देना ही होगा।
नए व्यापारी आएंगे दायरे में
टैक्स बार एसोसिएशन के महासचिव शिशिर नेमा ने बताया कि अभी तक 10 लाख से ज्यादा का टर्नओवर करने वाले कारोबारी इसके दायरे में आते थे, अब यदि कारोबार निरंक है तो भी उन्हें प्रोफेशनल टैक्स चुकाना पडेग़ा।
यह है स्थिति
शहर में एसजीएसटी और वैट में 16 हजार से ज्यादा कारोबारी पंजीकृत।
जिले में बीते वित्तीय वर्ष में 25.77 करोड़ से अधिक मिला था वृत्तिकर।
चालू वित्तीय वर्ष के लिए केवल 31 मार्च तक का समय निर्धारित।
नए नियमों के तहत निरंक कारोबार होने पर भी चुकाना होगा टैक्स।
पहले वार्षिक टर्नओवर पर लगता था कर, इसमें भी स्लैब तय था।