बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान पर मुश्किल आन पड़ी है। क्योंकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीना कपूर खान को नोटिस भेजकर 7 दिन में जवाब मांगा है...इनके साथ इनसे भी मांगा जवाब..
बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान पर मुश्किल आन पड़ी है। क्योंकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीना कपूर खान को नोटिस भेजकर 7 दिन में जवाब मांगा है। दरअसल बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान अपनी किताब के टाइटल करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबल (kareena Kapoor's Pregnancy Bible) को लेकर विवादों में घिर गई हैं। इसी मामले पर जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur Highcourt) ने करीना कपूर खान को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यही नहीं करीना कपूर खान के साथ ही हाईकोर्ट ने किताब सेल करने वाली कंपनियों से भी जवाब मांगा है।
दरअसल मशहूर फिल्म अभिनेत्री करीना कपूर ने प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले अनुभवों को शेयर करते हुए एक किताब लिखी। करीना कपूर खान ने इस किताब का नाम रखा है 'करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबल'(Kareena Kapoor Khan's Pregnancy Bible)। इस किताब (Book) के टाइटल (Title) पर जबलपुर के क्रिश्चियन समाजसेवी एक शख्स ने आपत्ति जताई है।
क्रिश्चियन समाजसेवी का मानना है कि करीना कपूर ने प्रेग्नेंसी बाइबल में जो 'बाइबल' (Bible) शब्द का उपयोग किया है, वह सरासर गलत है और इससे ईसाई समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
जबलपुर के क्रिश्चियन समाजसेवी और पेशे से वकील इस शख्स का नाम है क्रिस्टोफर एंथनी। क्रिस्टोफर एंथनी ने करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबल' किताब के टाइटल पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें कोर्ट ने करीना कपूर और किताब बेचने वालों से जवाब मांगा गया है। वकील क्रिस्टोफर एंथनी का मानना है कि सिर्फ किताब के प्रचार के लिए ही इस तरह से ईसाई धर्म की पवित्र किताब का नाम टाइटल में लेकर करीना कपूर ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास किया है। वकील क्रिस्टोफर एंथोनी ने अपनी याचिका में आरोप लगाते हुए कहा है कि किताब के टाइटल 'बाइबल' से ईसाइयों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
याचिका में उठाए गए तर्कों को सुनकर हाईकोर्ट ने अभिनेत्री करीना कपूर खान को नोटिस जारी किया है, ताकि करीना कपूर साबित कर सकें कि यह टाइटल उन्होंने धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं दिया है।
याचिकाकर्ता ने इस किताब के विक्रय पर रोक लगाने की भी मांग की है। इसीलिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस पुस्तक को ऑनलाइन बेचने वाली कंपनियों को भी पक्षकार बनाते हुए नोटिस भेज कर जवाब मांगा है।