60 एकड़ में अवैध प्लॉटिंग और बिल्ंिडग बनाने वाले कॉलोनाइजर्स पर कसा शिकंजा
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने जबलपुर जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि घाना ग्राम पंचायत के अंतर्गत कृषि भूमि में अवैध कॉलोनियों, फ्लैट्स, ड्यूप्लेक्स आदि के निर्माण के मसले पर सक्षम अधिकारी पटवारी द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार विधि अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इस मत के साथ एक याचिका का निराकरण कर दिया।
यह है मामला
रसल चौक निवासी विजय एसके शुक्ला ने याचिका दायर कर कहा था कि जबलपुर की समीपी ग्राम पंचायत घाना के अंतर्गत कृषि भूमि पर कई कॉलोनाइजर्स व बिल्डर्स अवैध कॉलोनियों का निर्माण कर रहे हैं। विभिन्न खसरा नम्बरों की करीब ६० एकड़ अलग-अलग जमीन पर यह अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि इसके लिए मप्र सरकार के नियमानुसार आवश्यक अनुमतियां नहीं ली गईं, ना ही प्रक्रिया का पालन किया गया। शिकायत पर पटवारी से मामले की जांच कराई गई। पटवारी ने १७ कॉलोनाइजर्स के निर्माणों को अवैध पाया था, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
महज तीन के खिलाफ प्रकरण दर्ज
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि उक्त शिकायत पर सक्षम राजस्व अधिकारी ने सुरेश, राजेश रजक व राजकुमार पटेल पर अवैध निर्माण के लिए प्रकरण दर्ज किए हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई। अधिवक्ता गुप्ता ने बताया कि पटवारी की रिपोर्ट में गुरविंदर कौर रांझी, परमजीत सिंह सारना, याचना श्रीवास्तव, कमलजीत, गगनप्रीत सिंह डंग, नमिता सरकार, लीला बाई, रश्मि सिंह, मनोज यादव, सुरेंद्र पटेल, राजकुमार पटेल, गुरदीप सिंह, रमेश रजक, राकेश रजक, सुरेश रजक व वीरेंद्र सिंह के नामों का अवैध निर्माणकर्ताओं के रूप में उल्लेख है, लेकिन सरकार ने महज सुरेश रजक, राजेश रजक व राजकुमार पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अन्य दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए पटवारी की रिपोर्ट के अनुसार सभी दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। सरकार का पक्ष पीयूष धर्माधिकारी ने रखा।