होली का दिन तांत्रिक क्रियाओं के लिए बहुत ही लाभकारी
जबलपुर। होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रात 7:15 से 8:40 बजे तक है। शहर में पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बस्तियों में इसी दिन से ढोल-मंजीरा, अबीर गुलाल के साथ फाग गीतों और रंग पर्व का उत्सव शुरू हो जाता है, जिसका समापन रंगपंचमी पर होता है। होली का दिन तांत्रिक क्रियाओं के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इस दिन अभिमंत्रित और आमंत्रित कर जड़ी-बूटी घर लाई जाती है। कई प्रकार के मंत्रों की सिद्धियां भी की जाती हैं।
पर्व की तैयारियां शुरू
ज्योतिर्विद् जनार्दन शुक्ला के अनुसार एक मार्च को होलिका दहन होगा। दो मार्च को होली मनाई जाएगी। रंग पर्व का समापन 6 मार्च को रंगपंचमी के दिन होगा। इस बार होलिका दहन में भद्रा काल का दोष नहीं है। सुबह 8:11 बजे भद्रा शुरू होगा और शाम 7:10 बजे समाप्त हो जाएगा। होलिका दहन के दिन रात 7:34 बजे से रात 8:40 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस दौरान होलिका दहन श्रेष्ठ माना जाता है। एक मार्च को सुबह 8 बजे से रात 5 बजकर दो मिनट तक पूर्णिमा रहेगी। पूर्णिमा में होलिका दहन किया जाता है। शहर में होली को लेकर तैयारियां शुरु हो गई हैं। गली-गली, घर-घर जाकर चंदा लेनेवाले सक्रिय हो उठे हैं। परीक्षा को देखते हुए बच्चे, किशोर और युवा होलिका दहन और धुरेड़ी के दिन की प्लानिंग कर रहे हैं।
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ये काम नहीं करने चाहिए -
- इस दौरान सफेद रंग की खाने पीने की चीजों के सेवन से बचना चाहिए। दरअसल इस शाम टोने-टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। इसलिए इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिये।
- किसी भी तरह के टोटके का प्रयोग सिर पर जल्दी होता है, इसलिए होलिका दहन वाले दिन सिर को ढककर रखने की सलाह दी जाती है।
- टोने-टोटके को प्रभावशाली बनाने के लिए में व्यक्ति के कपड़ों का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अपने कपड़ों का ध्यान रखें। इनका कोई भी टुकड़ा इधर उधर न फेंके और न ही इसे अपने से ईर्ष्या करने वालों के हाथ लगने दें।
- गर्भवती महिलाएं भी इस दिन खास सावधानी बरतें। गर्भस्थ शिशुओं और छोटे बच्चों पर तंत्र-मंत्र का असर जल्दी होता है।
- भूल से भी अनजानी वस्तुओं को न छुएं और ना ही घर में लेकर आएं।
काली हल्दी के टोटके-
होली के अवसर पर ज्योतिषाचार्य सत्येंद्र स्वरुप शास्त्री बता रहे हैं काली हल्दी के टोटके। काली हल्दी दिखने में अंदर से हल्के काले रंग की होती है व उसका पौधा केली के समान होता है। काली हल्दी में बहुत ही गुणकारी प्रभाव होता है। इसमें वशीकरण की अद्भुत क्षमता होती है। काली हल्दी के पौधे को कुमकुम, पीले चावल से आमंत्रित कर होली वाले दिन लाया जाता है। जबलपुर में इस टोटके को बहुत से लोग करते हैं।
आमंत्रित करने का तरीका
एक थाली में कुमकुम, चावल, अगरबत्ती, एक कलश में शुद्ध जल रख, पवित्र कोरे वस्त्र पहन कर जाएं। फिर पौधे को शुद्ध जल से धोकर कुमकुम चढ़ाएं व पीले चावल चढ़ाकर 5 अगरबत्ती लगाकर कहें- मैं आपके पास अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु आया हूं आपको मेरे साथ मेरी मनोकामना की पूर्ति हेतु चलना है। फिर होली की रात में जाकर एक लोटा जल चढ़ाकर कहें कि मैं आपके पास आया हूं, आप चलिए मेरी मनोकामना की पूर्ति हेतु। इस प्रकार काली हल्दी (यह जड़ होती है) खोदकर ले आएं। बस यही आपके काम की है।