जबलपुर

भैया ने प्रेमानंद महाराज के लिए छोड़ा था जबलपुर, छोटे भाई ने किए कई खुलासे

Deepak Kumar Rasik Dulari- वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद भक्ति करता था जबलपुर का दीपक...। पुलिस मामले की जांच में जुटी...।
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Sep 26, 2026
premanand maharaj disciple
premanand maharaj disciple-वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद भक्ति करता था जबलपुर का दीपक...। पुलिस मामले की जांच में जुटी...। (फोटो सोशल मीडिया)

Deepak Kumar Rasik Dulari-वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक कुमार उर्फ रसिक दुलारी की मौत के बाद से मां, भाई और बड़ी बहन बेहद दुखी हैं, उनका रो-रोकर बुरा हाल है। जबलपुर के रहने वाले इस परिवार में मातम पसरा है, उन्होंने यह कल्पना भी नहीं की थी कि बेटा इस तरह विदा हो जाएगा। गौरतलब है कि दीपक चौथी मंजिल से गिर गया था। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

मथुरा जिले के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक कुमार उर्फ रसिक दुलारी सरन की चौथी मंजिल से गिरने से मौत हो गई है। घायल को तुरंत ही सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली है। वृंदावन कोतवाली पुलिस जांच में जुट गई है। शनिवार को उनका पोस्टमार्टम चल रहा है। मृतक दीपक आश्रम के पीछे ही बनी सोसायटी में रहते थे और जबलपुर के रहने वाले थे। दीपक ने 2025 में प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी और हमेशा उनकी सेवा में लगे रहते थे।

मां बोली- बेटे ने वृंदावन में करवाए थे दर्शन

दीपक की मां लोंग बाई पटेल बेटे के जाने के बाद से ही बेहद दुखी हैं, रोते-रोते मीडिया को बताती हैं कि दोपहर में फोन से सूचना मिली कि दीपक की तबीयत खराब हो गई है। यहां पहुंचे तो सबकुछ खत्म हो गया। मां ने बताया कि वे पिछले साल दीपक से मिलने वृंदावन आई थी वो दूसरी जगह रही थी। तब पांच दिन वृंदावन में बेटे ने उन्हें मंदिरों के दर्शन कराए थे। मां बताती हैं कि दीपक का मन जबलपुर में नहीं लगता था तो वो प्रेमानंद जी महाराज के पास वृंदावन चले गया था फिर वो लौटकर नहीं आया।

भाई बोले- नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं भैया

प्रेमानंदजी महाराज के शिष्य दीपक पटेल (लोधी) के बारे में बताया जा रहा है कि जबलपुर में रहते हुए धार्मिक रुचि बढ़ने लगी थी। उसके मन में वैराग्य की भावना आने लगी थी। दीपक का छोटा भाई है, जिसका नाम मनीष पटेल है। इनकी एक सबसे बड़ी बहन भी है। मनीष बताते हैं कि भैया कॉलेज में पढ़ते थे, वे पढ़ने में बहुत अच्छे थे। उनमें धार्मिक रुचि काफी थी। वृंदावन जाने से पहले वे भैया नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं। वे प्रेमानंद महाराज के अनुयायी बन गए। मनीष बताते हैं कि एक बार भैया जबलपुर लौट आए थे, करीब दो साल पहले वृंदावन गए तो फिर नहीं लौटे। धीरे-धीरे भैया से बात भी कम होने लगी। यहां आते थे तो उ्हें दूसरी जगह रहना पड़ता था और कुछ वक्त के लिए ही मिलना होता था।

Updated on:
26 Sept 2026 12:31 pm
Published on:
26 Sept 2026 10:27 am