जबलपुर

प्रोटीन और गुड़ के साथ रोज चबाती 2 किलो चना, पुलिस की घोड़ी के रानी जैसे ठाठ बाट

Jabalpur Police Mare : पुलिस के बेड़े में जुड़ेंगे 10 नए घोड़े, छठवीं बटालियन एसएएफ ने भेजी है मांग, लॉ एंड ऑर्डर से वीआइपी ड्यूटी तक, रोज देते हैं 11 किलो घास
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Sep 13, 2026
जबलपुर पुलिस की घोड़ी के रानी जैसे ठाठ बाट
जबलपुर पुलिस की घोड़ी के रानी जैसे ठाठ बाट- Demo pic- फोटो सोर्स : Patrika

Jabalpur Police : लॉ एंड ऑर्डर और भीड़ नियंत्रण में अहम भूमिका निभाने वाले जबलपुर पुलिस के अश्वारोही दल को जल्द 10 नए घोड़े मिलने वाले हैं। 6वीं बटालियन एसएएफ ने इसके लिए मांग भेजी है। बटालियन के अस्तबल में 20 घोड़ों को रखने की क्षमता है, लेकिन फिलहाल यहां 10 घोड़े हैं जिनमें 2 घोड़ी है। नए घोड़ों के आने के बाद अस्तबल की क्षमता के अनुरूप दल को मजबूत किया जा सकेगा। अभी यहां थारो ऑस्ट्रेलियन, हाफ मिक्स्ड ब्रीड और इंडियन काठियावाड़ी नस्ल के घोड़े हैं। इनकी कीमत लाखों रुपए तक होती है। अस्तबल में घोड़ा घोड़ी का खास ध्यान रखा जाता है। 9 साल की घोड़ी लैला और 7 साल की घोड़ी पायल तो मानो रानी बनकर रह रहीं हैं। इन्हें गुड़ चना के साथ प्रोटीन युक्त भोजन दिया जाता है।

अश्व दल प्रभारी एसआई उगम सिंह राठौर ने बताया कि घोड़ों की खरीद दिल्ली से की जाती है, जबकि इन्हें विशेष प्रशिक्षण इंदौर स्थित आरएपीटीसी में दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद इन्हें जबलपुर पुलिस के अश्वारोही दल में शामिल किया जाता है।

वीआइपी सुरक्षा और त्योहारों में उपयोग :

कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी ने बताया कि अश्वदल के घोड़ों का उपयोग दशहरा, गणेश उत्सव और अन्य प्रमुख त्योहारों में गश्त के लिए किया जाता है। वीआइपी आगमन, सेरेमोनियल परेड और घुड़सवारी प्रतियोगिताओं में भी इनकी भूमिका रहती है। घोड़ों के रिटायर होने के बाद भी उन्हें अस्तबल से अलग नहीं किया जाता। फिलहाल तीन घोड़े रिटायर हैं और उनकी देखभाल की जा रही है।

हर घोड़े की डाइट तय

असिस्टेंट कमांडेंट रीना पांडे के अनुसार प्रत्येक घोड़े के लिए डाइट चार्ट निर्धारित है। रोजाना उन्हें करीब 2 किलो चना, डेढ़ किलो जौ, आधा किलो चोकर, 30 ग्राम नमक और 11 किलो सूखी घास दी जाती है। इसके अलावा गुड़ और प्रोटीन युक्त अनाज भी भोजन में शामिल हैं। घोड़ों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी होती है।

4 साल की उम्र से शुरू होती है सवारी :

अश्वदल प्रभारी एसआई सिंह के अनुसार घोड़ों की सवारी करीब चार वर्ष की उम्र से शुरू होती है। सामान्य तौर पर वे 20 वर्ष की उम्र तक सक्रिय रूप से ड्यूटी करते हैं। इसके बाद उन्हें बुजुर्ग श्रेणी में रखा जाता है। अश्वों की देखरेख के लिए दो आरक्षक, दो प्रधान आरक्षक और एक एएसआई तैनात हैं। जबलपुर में पुलिस के बेड़े में 10 नए घोड़े जोड़ने की कवायद चल रही है।

एसएएफ के अस्तबल में घोड़े
घोड़े का नाम - उम्र
यशवंत- 32 वर्ष
मल्हार- 29 वर्ष
राज- 15 वर्ष
टिंकरवेल 15 वर्ष
मेरलिन 16 वर्ष
आजाद 14 वर्ष
कर्ण 08 वर्ष
पवन 08 वर्ष
लैला (घोड़ी) 09 वर्ष
पायल (घोड़ी) 07 वर्ष

Updated on:
13 Sept 2026 10:24 am
Published on:
13 Sept 2026 10:23 am