Jabalpur Tragedy: क्रूज का पायलट बोला- संभलने का मौका नहीं मिला, राहत कार्य के लिए सेना भी पहुंची, बांध में अब तक 9 शव मिले
Jabalpur Tragedy: जबलपुर के बरगी बांध में क्रूज हादसा तेज आंधी के साथ आया। देखते ही देखते कई परिवारों की पिकनिक वाली खुशी दुख की चीत्कार में बदल गई। दृश्य देखने वालों की आंखें पथरा गईं। अपनों को खोने वालों की रुदन भरी चीत्कार सुन हर किसी का कलेजा फटा जा रहा था। गुरुवार शाम बरगी डैम में पलटा क्रूज एमपी टूरिज्म का था। हादसे की वजह तेज आंधी बताई जा रही है। क्रूज के पायलट ने भी इस बात की तस्दीक की है कि तेज तूफान के कारण यह हादसा हुआ। तेज आंधी से क्रूज अनियंत्रित होकर बांध में डूब गया।
अपर डेक में बचे:
घटना के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि जिन लोगों को सही सलामत निकाल लिया गया, उनमें से अधिकतर क्रूज के अपर डेक पर थे। क्रूज लोअर डेक के बाहर खड़े थे, जो बच गए। लोअर डेक बंद होने से पर्यटकों को निकलने का मौका नहीं मिल पाया। जहां क्रूज डूबा वह जगह 50 से 60 फीट तक गहरी है। पथरीला इलाका है। इस कारण क्रूज फंस गया।
जैसे ही क्रूज डूबा, वहां हाहाकार मच गया। पंपिग स्टेशन के पास काम कर रहे श्रमिकों ने पानी में छलांग लगा दी। तत्काल राहत कार्य शुरू किया और इन्हीं की मदद से पानी में डूब रहे लोगों को बाहर निकाला गया।
एसडीआरएफ की टीम वहां पहुंची, तो मोटरबोट में जवान क्रूज के पास पहुंचे। कुछ आवाज आई। इसके बाद लगातार क्रूज काटने का प्रयास शुरू किया गया। चार घंटे बाद उसे काटा जा सका। घटना के लगभग चार घंटे बाद उसमें फंसे रियाज (56) को सही सलामत निकाल लिया गया।
20 वर्ष पुराना क्रूज 29 टिकट बिके
क्रूज का निर्माण 2006 में हुआ था। क्षमता 90 यात्रियों की है। पर्यटन विभाग ने गुरुवार को 29 टिकट बेचे। कई लोग बिना टिकट के भी बैठै थे। पता चला है कि लोअर डेक में 14 पर्यटकों के साथ ही एक बच्ची थी। एमपीटी के दो कर्मचारी भी थे। हादसे के बाद रात सवा दस बजे सेना के जवान भी पहुंचे। अधिकारियों के साथ मिलकर सेना के जवानों ने क्रूज निकालने की कार्ययोजना बनाई। हाईड्रा, अन्य भारी वाहन बुलाया गए।
बांध में जब क्रूज डूबा उस समय आंधी चल रही थी। बताया जा रहा है कि हवा की रफ्तार 40kmph थी। क्रूज के पायलट महेश के मुताबिक अचानक तेज तूफान आ गया। जबर्दस्त हवाओं के कारण क्रूज अनियंत्रित हो गया और बांध में डूब गया। हमें संभलने तक का मौका नहीं मिला। पायलट महेश का यह भी कहना है कि क्रूज में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे। उन्हें क्रूज चलाने का 10 साल का अनुभव है।