
जबलपुर/ मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव भले ही डिले हो गए हैं, फिर भी एक तरफ राजनीतिक दल अपनी तैयारियां जोर शोर से कर रही हैं वहीं, चुनाव आयोग की ओर से व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। हालांकि, सियासत में कब कौनसा अध्याय जुड़ जाए, कोई नहीं जानता। सियासी समीकरण में बदलाव इसी का नाम है। कब किरदार बदल जाएं, किसी को नहीं पता। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नगरीय निकाय के लिए होने वाले चुनाव से पहले नजारा कुछ ऐसा ही है। वॉर्ड आरक्षण के बाद यहां स्थित 79 वार्डों में से 40 वार्ड इस बार महिला आरक्षित कर दिये हैं।
बैठकों से पोस्टरों तक महिलाएं संभाल रही मोर्चा
जारी आदेश के बाद जबलपुर नगर सरकार की दौड़ में अब पार्षदों की धर्मपत्नी चुनावी मैदान में नजर आ रही हैं। उन्हें आगे लाने में उनके पति भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।शहर के 79 में से 40 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किये गए हैं। इस सियासी उठापटक के बाद इन 40 वार्डो से महिलाएं चुनाव लड़ेंगी। यही वजह है कि, पुरुष दावेदारों की ओर से अपनी पत्नियों को चुनावी मैदान में आगे किया है। पार्षद पद के लिए अपनी दावेदारी सुनिश्चित करने के लिए पत्नियां बैठकों से लेकर पोस्टरों में दिखाई देने लगी हैं।
महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम
पत्नियों को आगे करने में भाजपा और कांग्रेस दोनो ही एक समान हैं। दोनों ही दलों के लिये महिला आधारित चुनावी रणनीति बनाई गई है। कांग्रेस का कहना है कि 40 वार्डो से महिलाओं का नेतृत्व महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा अच्छा कदम है और पार्टी अब निकाय चुनाव में जीत दिलाने वाली दावेदारों को ही मौका देगी। अब उसमें कोई गुरेज नहीं है कि अगर वे संभावित पार्षद दावेदार की पत्नियां ही ना हों। वहीं, बीजेपी की ओर से दावेदारों का कहना है कि, अगर श्रीमती जी योग्य हैं तो चुनाव लड़ने में कोई दिक्कत किसे होगी।
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