MP News: एमपी हाईकोर्ट ने पुलिस तंत्र की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर अहम सवाल खड़े करते हुए सख्त रुख अपनाया है। राजनीतिक दबाव, एफआईआर की प्रक्रिया और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर अदालत की टिप्पणी ने व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।
MP High Court strong remarks:एमपी हाईकोर्ट ने जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू व एसपी संपत उपाध्याय को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। यह मामला कथित तौर पर राजनीतिक दबाव के कारण हमले के शिकार एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रथा को चुनौती देने से संबंधित है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने टिप्पणी की, "जब पुलिस अधिकारी खुद सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता को कैसे सुरक्षा प्रदान करेंगे?" (MP News)
कोर्ट ने नेताओं के दबाव में पुलिस अधिकारियों की ओर से एकपक्षीय कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। वाहन चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी से मारपीट और उसकी वर्दी फाड़ने के मामले में उल्टे उसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज किए जाने को हाईकोर्ट ने गंभीर लापरवाही निरूपित किया।
जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि वीडियो वायरल होने और पुलिस कर्मी की शिकायत से आरोपियों की पहचान स्पष्ट होने के बावजूद नेताओं के नाम एफआइआर में क्यो नहीं जोड़े गए और मामला अज्ञात के विरुद्ध क्यों दर्ज किया गया। हाईकोर्ट ने पूरे मामले को पुलिस विभाग का मनोबल गिराने वाला बताया। साथ ही आगामी सुनवाई में लार्डगंज थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर दोनों काउंटर एफआइआर की केस डायरी पेश करने के निर्देश दिए है। (MP News)