
MP News :मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े 100 मामलों पर जबलपुर हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच में सुनवाई जारी रही। कोर्ट के समक्ष सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप संचेती ने दो घंटे बहस की। उन्होंने तर्क दिया कि, राज्य सरकार ने आरक्षण बढ़ाने से पहले सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आवश्यक क्वांटिफायबल डेटा एकत्र नहीं किए। केवल जनसंख्या के आधार पर आरक्षण बढ़ाना संविधान और सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों के विपरीत है।
बहस के दौरान बीआर आम्बेडकर विश्वविद्यालय के सर्वे की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सर्वे में केवल ओबीसी वर्ग के 10 हजार लोगों को शामिल किया गया, अन्य वर्गों को नहीं। ऐसे में तुलनात्मक अध्ययन के अभाव में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का सही आकलन सम्भव नहीं है। यह भी दलील दी गई कि सर्वे के अनुसार ओबीसी वर्ग के 23.91 प्रतिशत लोग उच्च शिक्षित हैं।
सामान्य वर्ग की ओर से ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन का हवाला देते हुए कहा गया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व लगभग 77 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसलिए ठोस और वस्तुनिष्ठ आंकड़ों के बिना आरक्षण बढ़ाने का निर्णय उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। सामान्य वर्ग के वकील मनोज शर्मा ने दलील दी कि सरकार बिना किसी अंतिम फैसले के लगातार हजारों कर्मचारियों को प्रमोशन दे रही है। बाद में कोर्ट का निर्णय इन प्रमोशन के खिलाफ आया, तो इतनी बड़ी संख्या में दिए गए प्रमोशन को वापस लेना मुश्किल हो जाएगा। इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने मोर्चा सम्भाला। महाधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार की ओर से दी जा रही सभी पदोन्नतियां कोर्ट के अंतिम फैसले पर ही निर्भर करेंगी। फैसला सरकार के खिलाफ आता है, तो बिना देरी किए सभी प्रमोशन तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे। हाईकोर्ट ने सरकार के इस लिखित और मौखिक आश्वासन को रिकॉर्ड में ले लिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने अवगत कराया कि, हाईकोर्ट की विशेष बेंच में बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। पहले सामान्य वर्ग की बहस पूरी होगी, इसके बाद राज्य शासन और ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दलीलें प्रस्तुत करेंगे। सामान्य वर्ग की ओर से अमन लेखी तथा यूथ फाॅर इक्वेलिटी की ओर से गोपाल शंकर नारायण पहले ही दलीलें पूरी कर चुके हैं।