
Dayodaya Express Vendor sold sleeper seat: ट्रेनों में पारदर्शी आरक्षण व्यवस्था के रेलवे के दावों के बीच व्यवस्था की एक नई तस्वीर सामने आई है। गोंडवाना एक्सप्रेस में इसी पखवाड़े विजिलेंस टीम ने 2 टीसी को अधिक राशि के साथ पकड़ा था। अब जबलपुर से अजमेर जाने वाली दयोदय एक्सप्रेस में सीट बेचने का मामला सामने आया है। पत्रिका टीम के स्टिंग में साइड पेंट्री का काम करने वाले एक वेंडर ने अपनी आवंटित सीट 600 में एक यात्री को दे दी।
वेंडर ने दावा किया कि चार्ट बनने के बाद उन्हें 2 सीटें मिलती हैं। सीट बेचने के एवज में टीसी को भी 300 रुपए दिए जाते हैं। मामला ट्रेन क्रमांक 12181 दयोदय सुपरफास्ट एक्सप्रेस का है, जो जबलपुर से अजमेर रवाना होती है। ट्रेन के स्लीपर कोच में खाना बेचने वाला वेंडर एक अधेड़ यात्री के पास पहुंचा। उसने यात्री को सीट उपलब्ध कराने की पेशकश की और उसे अपनी आवंटित सीट पर बैठा दिया। यात्री को कोटा जाना था।
इसके बाद वेंडर 2-3 बार यात्री के पास पहुंचा और रुपए देने के लिए दबाव बनाता रहा। उसने कहा कि पैसे दे दीजिए, ताकि वह भी फ्री हो जाए और यात्री भी आराम से बैठ सके। यात्री ने रकम पूछी तो वेंडर ने पहले सीट की कीमत 700 रुपए बताई, लेकिन बाद में 600 रुपए में देने की बात कही। यात्री ने बेटे से ऑनलाइन भुगतान कराने की बात कही तो वेंडर ने साफ मना कर दिया। इसके बाद यात्री ने जेब से 600 रुपए नकद निकालकर वेंडर को दिए। पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हुआ।
पत्रिका टीम ने वेंडर से पूछा कि सीट देने की व्यवस्था कैसे होती है। वेंडर ने बताया कि चार्ट बनने के बाद उन्हें 2 सीटें मिलती हैं। उसका कहना था कि ट्रेन में खाना-पानी बेचने के साथ सीट यात्री को देकर अतिरिक्त कमाई कर लेते हैं। वेंडर ने दावा किया कि वह सामान्य तौर पर एक सीट 700 रुपए में देता है और इसमें से 300 रुपए टीसी को देने की बात कही।
स्टिंग में मामला एक यात्री को सीट देने तक सीमित नहीं रहा। पत्रिका टीम ने जब पूछा कि भविष्य में सीट की जरूरत हो तो क्या व्यवस्था हो जाएगी, तो वेंडर ने अपना मोबाइल नंबर देने की बात कही और फोन करने को कहा। उसने यात्री को जनरल टिकट साथ रखने की सलाह भी दी।