रिसर्च में खुलासा : नर नीलगाय एक ही स्थान पर करता है बीट
जबलपुर. जंगल और गांवों के आस-पास खेतों में रहने वाला नर नीलगाय भी स्वच्छता के मायने समझता है। नीलगाय (रोजड़) खेत और जलस्रोत जहां कहीं भी जाए, लेकिन बीट (शौच) के लिए एक ही स्थान पर जाता है। इसका खुलासा रोजड़ गणना की नई तकनीकी ईजाद करने के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट में हुआ है।
नीलगायों द्वारा फसलों की बर्बादी की शिकायतें बढऩे पर प्रदेश शासन ने राज्य वन अनुसंधान संस्थान के माध्यम से इनकी गणना की विधि पर रिसर्च कराया। इसके लिए दो पुरानी गणना पद्धतियों के साथ तीसरी विधि अपनाई जा रही है। राज्य वन अनुसंधान संस्थान के सीनियर रिसर्च ऑफिसर डॉ. मयंक वर्मा ने वन विहार, भोपाल में रोजड़ की गणना की नई विधि ईजाद की है। उन्होंने ट्रैप कैमरे की रेकॉर्डिंग, जीपीएस सिस्टम, ट्रांजिट लाइन और पैलेट ग्रुप काउंट (शौच) के माध्यम से नई जानकारी जुटाई है। उन्होंने बताया, जुलाई 2017 से अप्रैल 2018 तक की रिसर्च में पता चला है कि नर रोजड़ काफी दिनों तक एक ही स्थान पर बीट करता है। मादा नीलगाय में यह प्रवृत्ति नहीं है। एक नर नीलगाय के साथ तीन से पांच मादा नीलगाय होती हैं। उन्होंने बताया, प्रजनन रोकने में नर नीलगाय की शिफ्टिंग कारगर साबित हो सकती है।
झुंड में रहता है
डॉ. वर्मा ने बताया, नीलगाय बड़ा और शक्तिशाली जानवर है। यह घोड़े जैसा नजर आता है, लेकिन इसके शरीर की बनावट घोड़े जैसी संतुलित नहीं होती। यह झुंड में रहता है और तेज दौड़ता है। इसलिए उनकी एकदम सटीक गणना करना मुश्किल होता है। राज्य सरकार ने नीलगायों की संख्या कम करने के लिए इसे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा से 3 से हटाकर 5 में कर दिया है।
ये है योजना
बिहार और उत्तर प्रदेश में नीलगायों को मारने का विरोध होने पर सरकार ने उनकी शिफ्टिंग और बंधियाकरण की योजना बनाई है। वन विभाग ने बोमा कैप्चर सिस्टम से नीलगायों की शिफ्टिंग का ट्रायल भी किया है। मप्र में मंदसौर, नीमच और रतलाम में इनकी संख्या ज्यादा है।
रोजड़ की गणना के मानकीकरण प्रोजेक्ट की रिपोर्ट भोपाल स्थित मुख्यालय को भेज दी गई है। यह तेज भागने वाली प्रजाति है। गणना में इसका सही अनुमान लगाने के लिए प्रोजेक्ट पर काम किया गया है।
सीएच मुरली कृष्णा, डायरेक्टर, राज्य वन अनुसंधान संस्थान