
Jabalpur School Holiday August 10: मध्यप्रदेशके जबलपुर में सोमवार (10 अगस्त) को सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों की छुट्टी रहेगी। शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी ने इसका आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक शहर में निकलने वाली कांवड़ यात्रा व गुप्तेश्वर शाही सवारी के कारण स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। आदेश में ये भी कहा गया है कि अवकाश के कारण बाधित शैक्षणिक पाठ्यक्रम की पूर्ति अन्य कार्य दिवसों में अतिरिक्त कालखण्ड लगाकर की जावेगी।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जबलपुर कलेक्टर के आदेशानुसार संस्कार कांवड़ यात्रा और गुप्तेश्वर शाही सवारी के दौरान जबलपुर शहर के स्कूलों के विद्यार्थियों को स्कूल आने जाने में होने वाली यातायात संबंधी परेशानी एवं छात्र हित को देखते हुये दिनांक 10.08.2026 दिन सोमवार को नगर पालिक निगम क्षेत्र में संचालित समस्त शासकीय/अशास. मान्यता प्राप्त /सीबीएसई/आईसीएसई के विद्यार्थियों के लिये अवकाश घोषित किया जाता है।
जबलपुर शहर में संस्कार कांवड़ यात्रा एवं गुप्तेश्वर शाही सवारी यात्रा दिनांक 10.08.2026 दिन सोमवार को प्रातः 07:00 बजे ग्वारीघाट के सिद्धघाट से प्रारंभ होकर रामपुर चौक, गोरखपुर, शास्त्री ब्रिज, तीनपती, मालवीय चौक, लार्डगंज, बड़ा फुहारा, कमानिया गेट, सराफा, लकडगंज, बेलबाग, घमापुर शीतलामाई, कांचघर, सतपुला, गोकलपुर, रोझी, खमरिया स्टेट होते हुए खमरिया थाना अंतर्गत ग्राम मटामर, तहसील पनागर, जबलपुर स्थित पहाड़ी पर स्थित भगवान नर्मदेश्वर भोलेनाथ मंदिर कैलाशधाम तक सम्पन्न होगी। इस दौरान कांवड यात्रा व शाही सवारी में हजारों की संख्या में भक्त शामिल होंगे। शाही सवारी व कांवड यात्रा को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए हैं और कई मार्गों पर ट्रैफिक भी डायवर्ट किया है।
जबलपुर में सावन के पवित्र महीने में हर साल महाकाल की तर्ज पर प्रसिद्ध गुप्तेश्वर महादेव की शाही सवारी निकाली जाती है। यह भव्य यात्रा गुप्तेश्वर मंदिर से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरती है, जिसमें हजारों शिव भक्त शामिल होते हैं। यह मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। यहां यह भी बता दें कि जबलपुर का गुप्तेश्वर महादेव मंदिर अतिप्राचीन व प्रसिद्ध मंदिर है, ऐसा माना जाता है कि इस प्राचीन गुप्तेश्वर शिवलिंग की पूजा स्वयं भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान की थी।