जबलपुर

diwali festival five day celebration shubh muhurat इस दिन नर्क से मिलती है मुक्ति, जानें पांच दिवसीय दीपोत्सव और पूजा शुभ मुहूर्त

इस पांच दिवसीय दीपोत्सव की दीपोत्सव के रहस्य और शुभ मुहूर्त व पूजन विधि व पढ़े जाने वाले मंत्र पंडित जनार्दन शुक्ला से

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Oct 09, 2017
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जबलपुर। दीपावली सेलिब्रेशन केवल 1 दिन के लिए नहीं होता बल्कि इसके साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव मनाया जाता है। यह त्रयोदशी तिथि से शुरु होकर दूजी तिथि तक चलता है। हर दिन की एक अलग मान्यता है अलग विधा है और अलग पूजन है। कभी नर्क का पूजन होता है तो कभी आरोग्य के देवता का पूजन। भाइयों की सुख समृद्धि के साथ यह संपन्न होता है। आइए जानते हैं इस पांच दिवसीय दीपोत्सव की दीपोत्सव के रहस्य और शुभ मुहूर्त व पूजन विधि व पढ़े जाने वाले मंत्र पंडित जनार्दन शुक्ला से।

धनतेरस 17 अक्टूबर,

मंगलवार से दिवाली उत्सव का आगाज होगा। लंबे समय से जारी त्योहार की तैयारियां अब महापर्व की खुशियों में तब्दील हो जाएंगी। धनतेरस पर महालक्ष्मी पूजी जाती हैं। सोना-चांदी खरीदना शुभ है। घरों में 13 दीप कुबेर जलाए जाते हैं। शाम को दीप दान से अकाल मृत्यु का नाश होता है। आरोग्य देवता धन्वंतरि पूजे जाते हैं।

मान्यता: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर समुद्र मंथन में धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। देवताओं को अमृतपान करवाकर अमर किया, तभी से इसे मनाते हैं।

मंत्र: यक्षाय कुबेराय वैश्रवणआय धन्य धान्य अधिपतये, धन्य-धान्य समृद्धि में देही दापय स्वाहा।
मुहूर्त
लाभ : सुबह 10.30 से 12:00
अमृत : दोपहर 12:00 से 1.30
शुभ : दोपहर 3.00 से :4: 30
लाभ : रात्रि 7.30 से 9:00
खरीदी मुहूर्त : रात 7:25 से 9:23

रूप चौदस 18 अक्टूबर, बुधवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रूप चौदस या नरक चौदस कहा जाता है। सौंदर्य रूपी श्रीकृष्ण पूजे जाते हैं। सूर्योदय से पहले तेल व उबटन लगाकर स्नान करते हैं। इससे धन व ऐश्वर्य मिलता है। महिलाएं विशेष रूप से सजती-संवरती हैं। शाम को यम के नाम से दीप दान होता है। इस दिन हस्त नक्षत्र रहेगा।

मान्यता: हिरण्यगर्भ नामक नगर के योगीराज ने कड़ी साधना की। इससे शरीर में कीड़े पड़ गए। नारद ने उन्हें इस दिन व्रत करने का कहा। इससे रूप निखर गया, तभी से रूप चौदस मनाते हैं।

मंत्र: कृं कृष्णाय नम:
स्नान मुहूर्त : सुबह सूर्योदय से पहले
शुभ : सुबह 4.00 से 6.00


दीपावली 19 अक्टूबर, गुरुवार
कार्तिक अमावस्या यानी दीपावली की रात महालक्ष्मी, कुबेर की पूजा की जाती है। दीप रोशन कर रात में दरवाजे खुले रखते हैं। लक्ष्मी के स्वागत में पटाखे फोड़ते हैं।

मान्यता: रावण का वध कर श्रीराम अयोध्या लौटे तो पूरे नगर में दीपों से रोशन कर जमकर आतिशबाजी की गई। तभी से इस दिन दीपावली मनाई जाती है।

मंत्र: या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवने स्वलक्ष्मी:, पापात्मनां कृर्ताधया हृयेषु बुद्धि:। श्रद्धा सतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा, तां त्वां

नता: स्म परिपालय देषि विश्वम।।
मुहूर्त :
लाभ : सुबह 6.00 से 7.30
अमृत : सुबह 12 से 3 बजे तक शुभ
शुभ : शाम 7.30 से 9:00 चर


गोवर्धन पूजा 20 अक्टूबर, शुक्रवार
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा की जाती है। आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ की अल्पना बनाकर पूजन करते हैं। ब्रज के साक्षात देवता गिरिराज भगवान (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

मान्यता: इंद्र ने वृंदावन वासियों को डराने के लिए तेज वर्षा की तो श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर रक्षा की। तब से ब्रजवासी गोवर्धन की पूजा करते हैं। दिन में गाय व रात में बैल पूजन होता है। बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जाता है।

मंत्र: लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता,घृतं वहति यज्ञार्थ मम पापं न्यपोहतु।
मुहूर्त
शुभ: सुबह 6:30 से 12:40


भाईदूज 21 अक्टूबर , शनिवार
इस दिन बहनें तिलक लगाकर भाई की आरती उतारती हैं, मुंह मीठा करवाती हैं। भाई बहन को उपहार देते हैं।

मान्यता: सूर्य पुत्री यमुना के भाई यमराज बहन के घर नहीं जाते थे। एक दिन वे अचानक चले गए। बहन से खुश होकर उन्होंने कहा, वर मांगो। यमुना ने उनसे कहा कि जो बहन भाई को इस दिन भोजन करवाए उसे यमराज का भय न रहे। तभी से भाईदूज मनाते हैं। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। विश्वकर्मा के साथ कलम-दवात भी पूजते हैं।

मंत्र: भृतसतबा ग्रजाताहां भुंकसा भक्तामीडम शुवां, प्रीटाए यामा राजस्य अमुनाह विशेषत।
मुहूर्त
सुबह 6:30 से 1 बजे तक
राहुकाल सुबह 9 से 10:30

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