अस्पताल का संचालन पुराने अस्पताल के सेटअप पर हो रहा है। नतीजतन कैंसर से जुड़ी ज्यादातर जांच व इलाज के लिए जबलपुर समेत समूचे महाकोशल, विंध्य और बुंदेलखंड अंचल के लोगों को इंदौर, नागपुर, मुंबई, दिल्ली व अन्य महानगरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
State Cancer Institute : कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के नाम पर आलीशान अस्पताल भवन खड़ा कर दिया गया है। मरीज और उनके परिजन को उम्मीद थी कि यहां आधुनिक इलाज मिल सकेगा, लेकिन प्रदेश के इकलौते स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट अस्पताल में जांच सहित इलाज के लिए मशीनें ही नहीं हैं। अस्पताल का संचालन पुराने अस्पताल के सेटअप पर हो रहा है। नतीजतन कैंसर से जुड़ी ज्यादातर जांच व इलाज के लिए जबलपुर समेत समूचे महाकोशल, विंध्य और बुंदेलखंड अंचल के लोगों को इंदौर, नागपुर, मुंबई, दिल्ली व अन्य महानगरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
125 मरीज आते हैं ओपीडी में
100 के लगभग मरीज रहते हैं भर्ती
कैंसर अस्पताल में मरीजों के ट्यूमर वाले हिस्से पर रेडिएशन देने के लिए 35 करोड़ की लीनियर एक्सीलरेटर मशीन लगना है। इसकी मदद से केवल कैंसर सेल को खत्म किया जा सकता है। इसके साथ ही इंस्टीट्यूट में 16 एडवांस मशीनें आना हैं। इनमें मरीजों की सिंकाई के लिए तीन लीनियर एक्सीलरेटर मशीन शामिल हैं। ये मशीन थैरेपी की मौजूदा कोबाल्ट मशीन से एडवांस है। इससे ज्यादा संख्या में मरीजों की थैरेपी होगी। रेडिएशन कम होने से मरीज के लिए ज्यादा सुरक्षित है।
फ्लो साइटोमेट्री मशीन चिकित्सा उपकरण है जो कोशिकाओं के गुणों को मापने और विश्लेषण करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह मशीन कोशिकाओं के आकार, आकृति, और अन्य गुणों को मापती है। उनके आधार पर कोशिकाओं की पहचान और वर्गीकरण करती है। इसके माध्यम से रक्त कोशिकाओं की गणना, कैंसर कोशिकाओं की पहचान, इम्यून सिस्टम की जांच, संक्रमण की जांच, जेनेटिक विकारों की जांच होती है। इसमें लेजर, डिटेक्टर, कंप्यूटर होता है। ये मशीन 5 लाख से 50 लाख रुपये तक की आती है। ये बोनमेरो ट्रांसप्लांट यूनिट में स्थापित होना है।
● 1 मशीन है ओटी में दो दशक पुरानी
● 1 कोबाल्ट मशीन हो गई कंडम, बंद पड़ी
● 40 से 50 मरीज की कीमोथेरेपी
● 70से 80 मरीज तक की हो पाती है सिंकाई
● 15 ऑपरेशन हो सकते हैं अभी दिन में
● 3 महीने तक का ऑपरेशन के लिए करना पड़ता है इंतजार
स्टेट कैंसर अस्पताल में अभी 100 मरीजों की रेडियोथैरेपी और कीमोथैरेपी होती है। जबकि ओपीडी में रोजाना 120 से 150 मरीज आते हैं। मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में हेपा फिल्टर लगा होता है, जो बैक्टीरिया और वायरस को फिल्टर कर देता है। इस ओटी में एक कंट्रोल पैनल भी होता है, जो आर्द्रता के साथ अन्य सुविधाओं को कंट्रोल करता है। इसमें सभी उपकरण सेंसर लगाए जाते हैं, जिससे ऑपरेशन के पहले और बाद में किसी वस्तु को छूने से संक्रमण न फैले। मॉड्यूलर ओटी के सभी उपकरण डिजिटल और हाईटेक होते हैं। मुख्य ओटी में पहुंचने से पहले तीन चेम्बर होते हैं। ओटी में हर घंटे में 15-20 बार एयर बदलती है। अभी तक तक इसके केवल कमरे ही बने हैं।
भोपाल में शासन स्तर पर टेंडर जारी हो चुके हैं, जल्दी ही प्रक्रिया पूरी होगी और स्टेट कैंसर अस्पताल के लिए मशीनें उपलब्ध हो सकेंगी।