जबलपुर में हर महीने 2770 लोगों को काट रहे कुत्ते, झुंड हो गए खतरनाक
Street dogs case: शहर में छोटे बच्चे, बाइक सवार आवारा कुत्तों के सॉफ्ट टारगेट बन गए हैं। जबलपुर में प्रतिदिन औसतन 90-92 केस डॉग बाइट के आ रहे हैं। कुत्ते के काटने पर जहां बच्चों का कई दिन का स्कूल, कॉलेज का नुकसान होता है। वहीं कितने ही परिवारों का मेडिकल बिल बढ़ जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों का कई दिन का काम प्रभावित हो रहा है। हर माह 2700 से ज्यादा लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं।
वर्ष 2025 में जनवरी से जून के बीच प्रतिमाह 2770 डॉग बाइट की घटनाएं हुई हैं। वहीं इंदौर में इस अवधि में डॉग बाइट के 5051 केस आए हैं। मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 355, 356 व मप्र. नगर पालिका रजिस्ट्रीकरण व आवारा पशु नियंत्रण नियम 2023 प्रदेश में लागू है, लेकिन वह कागजों तक सीमित है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ.पीजी नाजपांडे का कहना है कि आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को ’’क्रूरता’’ बताना गलत है। इसे लेकर मेनका गांधी व राहुल गांधी की ओर से जारी वक्तव्य को लेकर नाजपांडे ने दोनों को आपत्ति भेजी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों अपने वक्तव्य पर पुनर्विचार करें। संगठन के रजत भार्गव ने बताया कि 11 अगस्त को जारी हुआ सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अचानक नहीं हुआ, इसके पूर्व में राजस्थान हाईकोर्ट में भी सभी सार्वजनिक स्थानों से आवारों कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने तो तीन वर्ष पूर्व ही ऐसा आदेश जारी किया है।
जबलपुर सहित मध्यप्रदेश में डॉग बाइट के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रीट डॉग की आबादी पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाना ही समाधान है। एक स्टडी के अनुसार देश में कुत्तों के काटने की घटना प्रति 1 हजार जनसंख्या पर 4.7 प्रतिशत है। वहीं ब्रिटेन में प्रति 1 हजार जनसंख्या पर काटने वाले कुत्तों का औसत 18.7 प्रतिशत है।