दिन के उजाले में भी रोशन स्ट्रीट लाइट

ढाई हजार का टाइमर न लगाने से नगर निगम को हर महीने लाखों की चपत, आधे शहर में दिन में भी जलती हैं स्ट्रीट लाइट

2 min read
Oct 25, 2015
street light
(फोटो-एलआईसी से शारदा चौक रोड पर शनिवार को जलती लाइट।)

जबलपुर।
शहर के कई हिस्सों में निगम की स्ट्रीट लाइट अभी लगी ही नहीं हैं। नए वार्डों की तरफ तो निगम ध्यान ही नहीं दे रहा है। वहीं, तकरीबन आधे शहर में दिन में भी स्ट्रीट लाइट जलती रहती हैं। इसकी वजह से हर महीने निगम को लाखों रुपए की चपत लग रही है। निगम की स्ट्रीट लाइट बुझाने की जिम्मेदारी कई जगह एमपीईएसबी को सौंपी गई है। बिजली विभाग के कर्मचारी अक्सर लाइट बंद करना और जलाना भूल जाते हैं। शनिवार को मदन महल से मेडिकल रोड पर दिन में भी स्ट्रीट लाइट जल रही थी। इसी तरह शांतिनगर, त्रिमूर्तिनगर में भी दिन में स्ट्रीट लाइट जलती रहती है। वहीं, बीटी तिराहे से गुलौआ चौक तक स्ट्रीट लाइट लगी है, लेकिन यह कई दिनों से बंद है। रात में यहां घुप अंधेरा रहता है। धनवंतरी नगर, अधारताल क्षेत्र में कई प्रमुख मार्गों पर दिन में भी स्ट्रीट लाइट जलती रहती है।

यह है अनुबंध

नगर निगम ने शहर में 43 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगवाई है। यहां टाइमर लगाया गया है। वहीं, शहर के एेसे मार्ग जहां सेंट्रल लाइटिंग की व्यवस्था है, वहां निगम टाइमर के माध्यम से स्ट्रीट लाइट बंद करता है और जलाता है। जबकि, शहर के अन्य इलाकों में जहां बिजली विभाग के पोल पर स्ट्रीट लाइट लगी हैं, उसे बंद करने और जलाने का अनुबंध निगम ने बिजली विभाग से किया है। कई बार इन कर्मियों की गैरमौजूदगी और लापरवाही के चलते दिन में भी लाइट जलती रहती हैं।

महज ढाई हजार की जरूरत

एक टाइमर लगभग ढाई हजार रुपए में आता है। इससे 25 से 30 स्ट्रीट लाइट कंट्रोल की जा सकती हैं। निगम यदि एक बार टाइमर शहर भर में लगवा दे, तो हर महीने काफी कम बिजली खर्च होगी।

हर महीने 75 लाख का भुगतान

बिजली विभाग को हर महीने विभाग 75 लाख रुपए का भुगतान करता है। एेसे में उसकी जिम्मेदारी है स्ट्रीट लाइट जलाना व बंद करना। हर स्थान पर टाइमर लगाना सम्भव नहीं है। बिजली विभाग के कर्मियों की लापरवाही से यह अक्सर खराब हो जाते हैं।

नवीन लोनारे,
कार्यपालन यंत्री, प्रकाश व्यवस्था
Published on:
25 Oct 2015 09:27 am
Also Read
View All