
Jabalpur news:एमपी के जबलपुर शहर में स्कूलों में शिक्षण कार्य समय पर शुरू कराने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस को लेकर व्यवस्था में फिर बदलाव किया है। अब शिक्षकों को सुबह 10.30 बजे से पहले ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। इसके बाद लगाई गई हाजिरी अमान्य मानी जाएगी। विभाग का मानना है कि निर्धारित समय तक उपस्थिति दर्ज होने से शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचेंगे और कक्षाओं का संचालन समय पर शुरू हो सकेगा।
विभाग को लगातार जानकारी मिल रही थी कि बड़ी संख्या में शिक्षक सुबह 11 बजे के बाद स्कूल पहुंच रहे हैं। इससे स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था। इसे देखते हुए विभाग ने ई-अटेंडेंस को लेकर सख्ती बरतने के निर्देश जारी किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे ने बताया कि नए आदेश के अनुसार अब स्कूलों में शिक्षकों को साढ़े 10 बजे से पहले पहुंचना होगा, ताकि समय पर पढ़ाई शुरू की जा सके। हर शिक्षक के लिए इसका पालन अनिवार्य है। निर्देशों का पालन नहीं करने पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बता दें ई-अटेंडेंस को लेकर प्रदेशभर में शिक्षकों के बीच असंतोष है। इसके खिलाफ शिक्षक कोर्ट भी जा चुके हैं।
शिक्षकों के मुताबिक ई-अटेंडेंस लागू होने के बाद से लॉगिन के समय को लेकर बदलाव किए जा रहे हैं। शुरुआत में सुबह 9.30 से 11.30 बजे तक लॉगिन की समय-सीमा निर्धारित थी। इसके बाद इसे सुबह 9.30 से 11 बजे और फिर 9.30 से 10.30 बजे तक कर दिया गया। अब 10.30 बजे से पहले उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे शिक्षक असमंजस में हैं कि विभाग की स्थायी समय-सीमा आखिर क्या है।
मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। कई जिलों में विभाग ऐसे शिक्षको की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने शासन के निर्देशों के बावजूद अब तक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 620 शिक्षक ऐसे है, जिनकी उपस्थिति ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज नहीं हो रही है। शेष शिक्षकों में अधिकांश ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना शुरू कर दिया है, लेकिन करीब 14 प्रतिशत शिक्षक अभी भी इस व्यवस्था से बाहर है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित शिक्षक ई-अटेंडेंस क्यों नहीं लगा पा रहे हैं। इसके लिए सभी विकासखंडों से जानकारी मांगी गई है।