जबलपुर

रानी दुर्गावती बलिदान दिवस : इस रानी के इंजीनियर्स ने बनाया था विश्व का सबसे छोटा किला

तीन मंजिला वॉच टावर 14वीं शताब्दी में बनाया गया था। जहां सैनिक रहकर करते थे निगरानी

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जबलपुर। मध्यप्रदेश टूरिज्म की गलियों में आज रुख करते हैं एक ऐसे स्थान की ओर जो ऐतिहासिक होने के साथ ही इंजीनियर्स के हुनर का ऐसा नमूना है, जिसे आज के आधुनिक युग में भी देखते ही बनता है। इतिहासकार इसे विश्व के सबसे छोटे किले की भी संज्ञा देते हैं। हालांकि इस ओर रिसर्च जारी है। जी हां हम आपको सैर करा रहे हैं रानी दुर्गावती के प्रिय स्थानों में से एक मदन-महल किले की। मदन महल किला महज किला ही नहीं वॉच टावर भी है।

दरअसल, मदन शाह द्वारा निर्मित मदन महल नष्ट हो चुका है। वर्तमान में जो स्वरूप मौजूद है वह महल के पास बनाया गया वॉच टावर है, जो ऊंचाई पर होने के चलते देखरेख के काम आता था। इतिहास विद बताते हैं कि इस चौकी का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ है। लेकिन आज इसे किला कहकर ही संबोधित किया जाता है।


1740-45 तक मौजूद था महल
इतिहास विद राजकुमार गुप्ता ने बताया कि मदनमहल राजा मदन शाह ने बनवाया था। जो 1740-45 ईस्वी तक मौजूद था। अब केवल अवशेष रह गए हैं, जबकि तीन मंजिला वॉच टावर 14वीं शताब्दी में बनाया गया था। जहां सैनिक रहकर निगरानी करते थे। महल के प्रवेश द्वार के पास बनाए गए इस टावर में एक सुरंग थी, जो जंगल के रास्ते खुलती थी। इसका प्रयोग महल से गुप्त रूप से निकलने के लिए किया जाता था। यह पहाड़ी के नीचे तक बनी थी। इसके अतिरिक्त किले के ऊपरी छोर पर चढऩे के बाद दिखने वाला शहर का मनोरम नजारा बेहद लाजवाब नजर आता है जो कि आकर्षण का केंद्र है।

कैसे पहुंचे
मदनमहल किला पहाडिय़ों पर स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। किले के समीप ही स्थित शारदा मंदिर रोड तक दो पहिया, चार पहिया वाहन पहुंच सकते हैं, लेकिन बांकी रास्ता आपको पैदल ही तय करना होगा। जबलपुर शहर पहुंचने के लिए रेल, सड़क और हवाई तीनों ही मार्ग उपलब्ध हैं।

Published on:
23 Jun 2018 05:42 pm