
CG Dhan Kharidi: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। संभाग भर में कुल 2,72,641 किसानों ने पंजीयन करवाया था, लेकिन इनमें से लगभग 16 प्रतिशत 4612 किसानों ने धान नहीं बेचा। जबकि 1 लाख 6,958 किसानों ने 40751 हेक्टेयर रकबा समर्पित कर दिया। इतनी बड़ी संख्या में किसानों का धान नहीं बेचना और समर्पण करना निश्चित तौर पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं और खरीदी के लक्ष्यों पर सवाल खडा कर दिया है।
सबसे चिंताजनक स्थिति दंतेवाड़ा जिले की रही, जहां लक्ष्य का मात्र 63.85 प्रतिशत ही पूरा हुआ। नारायणपुर और सुकमा जिलों में भी किसान सहभागिता कम रही। जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, कांकेर और कोंडागांव में लक्ष्य पूर्ति और किसानों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक रही, जबकि दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा में कम संख्या में किसानों ने रकबा समर्पित किया। कुल 1,06,958 किसानों ने 40,751 हेक्टेयर रकबा समर्पित किया। जिलेवार विवरण में बस्तर में 15,731, बीजापुर में 5,308, दंतेवाड़ा में 584, कांकेर में 49,089, कोंडागांव में 26,065, नारायणपुर में 3,868 और सुकमा में 6,313 किसानों ने रकबा समर्पित किया।
धान के परिवहन की रफ्तार धीमी बताई जा रही है। अब तक खरीदी गई कुल धान मात्रा में केवल 21.88 प्रतिशत का ही परिवहन किया जा सका है। इससे समितियों में भंडारण और प्रबंधन की समस्याएं बढऩे की संभावना है। किसानों ने तौल, भुगतान में देरी और केंद्रों पर अव्यवस्था जैसी समस्याओं का हवाला देते हुए बताया कि कई बार उन्हें परेशानी उठानी पड़ी।
धान खरीदी अभियान के समापन के बाद अब प्रशासन और किसानों की नजरें परिवहन और भुगतान व्यवस्था की गति पर टिकी हुई हैं। प्रशासन ने व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि धान खरीदी में लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अभी और सुधार की आवश्यकता है।
इस बार बस्तरं संभाग में कुल 44,612 पंजीकृत किसानों ने अपना धान नहीं बेच पाए हैं। जिलेवार आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक प्रभावित जिले बस्तर हैं, जहां 9,606 किसान धान नहीं बेच पाए। अन्य प्रभावित जिले इस प्रकार हैं: बीजापुर 2,862 किसान, दंतेवाड़ा 6,412 किसान, कांकेर 9,457 किसान, कोण्डागांव 7,734 किसान, नारायणपुर 4,257 किसान और सुकमा 4,284 किसान हैं।