Udaipur Food Festival: राजस्थान में झीलों के शहर के नाम से प्रख्यात उदयपुर बीते सप्ताह बस्तरिया व्यंजन की खुशबु से महकता रहा। यहां फुड फेस्टिवल में शौकीनों को आमट सब्जी, फुटु, कोदो खीर, मडिया पेज व चापड़ा चटनी परोसी गई।
Udaipur Food Festival: राजस्थान में झीलों के शहर के नाम से प्रख्यात उदयपुर बीते सप्ताह बस्तरिया व्यंजन की खुशबु से महकता रहा। यहां फुड फेस्टिवल में शौकीनों को आमट सब्जी, फुटु, कोदो खीर, मडिया पेज व चापड़ा चटनी परोसी गई। इन सभी ने पौष्टिकता से भरपूर इन नैसर्गिक खाद्य पदार्थ का न सिर्फ सेवन किया। बल्कि इसकी रेसिपी के बारे में जानने रुचि दिखाई। इस फूड फेस्टिवल दंतेवाड़ा से गई हुई आदिवासी युवा रीना गोंदे ने यह डिश वहां प्रदर्शित की थी।
जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव वर्ष के अंतर्गत राजस्थान के उदयपुर में ट्राईबल फूड फेस्टिवल का आयोजन किया था। इस फूड फेस्टिवल में राजस्थान, गोवा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों से आए हुए जनजातीय इलाके के भोजन व उन्हें बनाने वालों को आमंत्रित किया गया था। इस तीन दिवसीय आयोजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व दंतेवाड़ा जिले की आदिवासी युवा रीना गोंदे ने किया था।
रानी ने बताया कि उदयपुर जाने उसने दंतेवाड़ा से मिट्टी के बर्तन व कच्चा राशन ले गई थी। फेस्टिवल में उसने इन्हीं मिट्टी क बर्तन व चूल्हे की आग जलाकर आमट की सब्जी, ढाक के पत्तों में सिके हुए फुटु, बास्ता व महुआ के फूलों की सब्जी सहित कोदो की खिचड़ी व खीर पकाई थी। नॉनवेज स्टाल में उसने चापड़ा चटनी का प्रदर्शन किया था। यहां आए हुए जज व फुड ब्लागर्स ने इन सभी व्यंजनों का स्वाद चखा व उसकी रेसिपी जानी।
इस फेस्टिवल में लगभग सभी स्टाल में मिट्टी के बर्तन व मोटे अनाजों से बने व्यंजन कॉमन रहे। जाहिर है कि जनजातीय आहार पूरे देश में करीब एक जैसे ही हैं। यहां महाराष्ट्र की मासवड़ी, डांगर भाकरी और कड़क माकरी. मध्यप्रदेश की लाल ज्वारी के लड्डू और जंगली मौसंबी भाजी. जमू-कश्मीर की गुज्जर जनजाति की कद्दू खीर, दादर एवं नगर हवेली के बांस का अचार का भी लुत्फ लोगों ने उठाया।