CG Heat Alert: बस्तर में बढ़ती गर्मी के साथ हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। नगरसेना और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी कर सावधानी बरतने की अपील की है।
CG Heat Alert: बस्तर में बढ़ती गर्मी के साथ लू (हीट स्ट्रोक) का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत एडवाइजरी जारी कर लोगों से सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां अपनाने की अपील की है। नगर सेना के कमांडेंट सतोष कुमार मार्बल ने निर्देशों जारी करते हुए बताया कि लू एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो तेज धूप, अत्यधिक तापमान और शरीर में पानी की कमी के कारण होती है।
विशेष रूप से दोपहर के समय बाहर काम करने वाले मजदूर, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग इसके ज्यादा शिकार हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि लू लगने की स्थिति में शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकें और हल्के व ढीले सूती कपड़े पहनें। इसके अलावा दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और खाली पेट बाहर न निकलें। नींबू पानी, छाछ, लस्सी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है।
एडवाइजरी में बताया गया है कि सिर में तेज दर्द, चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार, शरीर में कमजोरी, घबराहट, पसीना कम आना और बेहोशी जैसे लक्षण लू लगने के संकेत हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर स्थिति को जन्म दे सकता है।
बता दें कि बस्तर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग खुले में काम करते हैं, जैसे कि किसान, मजदूर, निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिक और दैनिक वेतनभोगी। इसके अलावा छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार व्यक्ति भी लू के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे में इन वर्गों के लिए जोखिम और ज्यादा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन हर वर्ष गर्मी के मौसम में एडवाइजरी जारी कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास करते हैं। इसमें दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने, सिर को ढककर रखने और ओआरएस या तरल पदार्थों का सेवन करने जैसी सलाह दी जाती है।
हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण लू के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिससे प्रशासन को और अधिक सतर्क रहना पड़ रहा है। इसी वजह से स्कूलों के समय में बदलाव, कार्यस्थलों पर विशेष सावधानियां और स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन तैयारी जैसे कदम भी उठाए जाते हैं, ताकि समय रहते लोगों की जान बचाई जा सके और गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके।