CG News: प्रदेश में प्रदूषण का कहर जारी है। पचास माइक्रॉन से कम माइक्रॉन के पालीथीन से शहर पट गया है। बिना बिल के क्रय-विक्रय हो रहा है। इस वजह से जीएसटी की भी चोरी हो रही है।
CG News: ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी शहर में फर्जी तौर के पेकिंग का लेवल लगाकर पचास माइक्रॉन से कम के कैरी बैग की खपत लगातार जारी है। निर्माता व थोक विक्रेता इस प्रतिबंधित पॉलिथीन को 51 माइक्रॉन के सील लगे पैकिंग में भर कर स्टाक भरने के साथ ही साथ बाजार में खुलेआम बेच रहे हैं। इधर निगम है कि ऐसी शिकायत आने पर कुछ सब्जी बेचने वालों व कुछ फुटकर विक्रेताओं के यहां से जब्ती दिखाकर वाहवाही लूट लेता है। जबकि इसके बड़े गोडाउन को जानबूझकर छोड़ दिया जाता है।
CG News: इधर इस प्रतिबंधित पॉलिथीन के क्रय-विक्रय में बिल नहीं दिए जाने की वजह से यह थोक विक्रेता जीएसटी विभाग को भी चूना लगाने से नहीं चूक रहे हैँ। इस मामले में पर्यावरण विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है। (CG News) यह विभाग ऐसे प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ न तो मुहिम चलाता है न ही कोई सत कार्रवाई करता है। सिर्फ प्रचार-प्रसार व नोटिस देकर अपना पल्ला झाड़ लेता है।
पॉलिथीन का जहर शहर ही नहीं गांव मे भी भारी नुकसान हो रहा है गांव-गांव में पॉलिथीन के कूड़े के ढेर लगा चुके हैं इससे हमारी जमीन की उपजाऊ क्षमता खत्म हो रही है और फसलों को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। मवेशियों की भी जान इस पॉलिथीन से हो रही है।
नगर निगम के कर्मचारी गांव से आने वाले छोटे व्यापारियों एवं फुटपाथ पर बेचने वाले छोटे-छोटे व्यापारी को पकड़ते हैं। बड़े व्यापारियों को छूट दे रहे हैं यह बहुत ही गंभीर विषय है। (CG News) पॉलिथीन जैसे जहर के विषय को लेकर पत्रिका का अभियान प्रशासन के संज्ञान में आना चाहिए। अगर प्रशासन अवैध बिक्री करने वालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करेगा तो पर्यावरण बचाओ समिति जिला प्रशासन एवं नगरीय प्रशासन को ज्ञापन देकर इन दुकानों के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे ।
CG News: शहर के बीचों बीच पॉलिथीन विक्रेताओं के बड़े-बड़े गोडाउन हैं। यहां पर ऐसे प्रतिबंधित पालीथीन का भी भरपूर स्टाक रखा होता है। ऐसे गोडाउन पर अब तक निगम की कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा आग लगने की स्थिति में यह पॉलिथीन के गोदाम जान-माल के लिए भी घातक साबित होंगे। ऐसे में इन गोडाउन को घनी आवासीय बस्तियों से भी परे ले जाने की कवायद होनी चाहिए।