
Chhattisgarh Flood: बाढ़ प्रभावित गांव में पहुंचते ही सबसे पहले नजर उन घरों पर जाती है, जो कभी परिवारों की पहचान हुआ करते थे। अब कहीं सिर्फ दीवार का एक हिस्सा बचा है तो कहीं छत पूरी तरह जमीन पर आ चुकी है। आंगन में कीचड़ जमा है। घर के भीतर बिखरा सामान बता रहा है कि पानी किस तेजी से घुसा होगा। कुछ परिवार अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाने में जुटे हैं।
खेतों की तरफ बढ़ते ही तस्वीर और भारी हो जाती है। जिस खेत में कुछ दिन पहले तक धान की फसल लहलहा रही थी, वहां अब पानी और कीचड़ है। कई जगह धान की बालियां पानी में डूबी पड़ी हैं। महीनों की मेहनत आंखों के सामने बर्बाद हो गई। पत्रिका ने ऐसे ही बाढ़ से प्रभावित डोंगाघाट, छेपड़ागुड़ा, भेजापदर, नदीबोडऩा, नारायणपाल जैसे गांव का दौरा कर वहां की जमीनी हालात जानी।
सुमित्रा बघेल के मकान में बाढ़ के बाद दरारें आ गई हैं। घर का सामान भी खराब हो गया है। अब ङ्क्षचता यह है कि क्षतिग्रस्त मकान में रहना सुरक्षित है या नहीं। उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर अपना घर बनाया था। बाढ़ के बाद मकान और घरेलू सामान को हुए नुकसान ने परिवार की आर्थिक परेशानी बढ़ा दी है। सुधरु राम कश्यप, कमला बूटी, गुडिय़ा विक्रम, चमेली कश्यप, मेघनाथ बघेल, जैमिनी नाग, सोनामन बघेल, कोयली मौर्य, दशमती बघेल और लालचंद बघेल समेत कई परिवार भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं।
खेतों में बर्बाद फसल के बीच खड़े किसान कमलू कश्यप की ङ्क्षचता सिर्फ इस साल की फसल तक सीमित नहीं है। उन्होंने खेती के लिए बैंक से लाखों रुपये का कर्ज लिया था। कर्ज लेकर खेती की थी। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुका देंगे और घर-परिवार भी चलेगा। अब फसल ही नहीं बची। बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे, यही चिंता है। अगर सरकार से समय पर मदद नहीं मिली तो अगली खेती करना भी मुश्किल होगा। किसान अनादू नाग, गंगाधर बघेल, कमलू कश्यप, अंतराम बघेल और शोभाराम बघेल सहित कई किसानों की फसल बाढ़ में पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
अंतराम बघेल करीब 40 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने इतनी भयावह बाढ़ पहले नहीं देखी। उन्होंने बताा कि रात करीब 12 बजे पानी बढऩा शुरू हुआ था। देखते ही देखते पानी इतना बढ़ गया कि संभलने का मौका नहीं मिला। सुबह तक हालात पूरी तरह बदल चुके थे। कई रातें करीब छह फीट पानी के बीच गुजारनी पड़ीं। बिजली नहीं थी, साफ पानी की परेशानी थी। घर और सामान का जो नुकसान हुआ, उसे देखकर समझ नहीं आता कि शुरुआत कहां से करें।’’ अंतराम की बात खत्म होते ही आसपास खड़े ग्रामीण अपने-अपने नुकसान की कहानी बताने लगते हैं। किसी का अनाज गया तो किसी के घर का सामान। किसी के बच्चों की किताबें पानी में गल गईं।
बाढ़ में घर का राशन खराब होने के बाद प्रभावित परिवारों को अब रोजमर्रा का सामान भी बाहर से खरीदना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि घर में रखा चावल, दाल और दूसरा अनाज पानी की वजह से खराब हो गया। अब डोंगाघाट की दुकानों से दाल-चावल खरीदकर परिवार चलाने की कोशिश हो रही है। बाढ़ के दौरान जो सामान बच गया, उसे भी कीचड़ और गंदगी से निकालकर साफ करना पड़ रहा है। कई घरों में कॉपी-किताबें तक खराब हो गई हैं।
डोंगाघाट इलाके की है, जहां ग्रामीणों के मुताबिक करीब 160 एकड़ धान की फसल बर्बाद हुई है। बाढ़ ने सिर्फ खेत नहीं डुबोए, बल्कि 65 मकानों को पूरी तरह धराशायी कर दिया। 16 मकान क्षतिग्रस्त हैं और कुछ घरों पर अब भी गिरने का खतरा बना हुआ है। वहीं कई परिवार पॉलिथिन का टेंट बनाकर उसी में बच्चों के साथ राज गुजारने को मजबूर हैं।
प्रेमधान बघेल, दायधान बघेल, धनमती, सलीमराजू बघेल, जीतूराम, जेठूराम और सबीर सुरु समेत कई परिवारों के घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान खराब हुआ। सोमारू नाग और मोआसी नाग बताते हैं कि घर का सामान पानी में बह गया। अब स्थिति यह है कि दिन में लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और रात सुरक्षित जगह पर गुजारते हैं। कुछ परिवारों के लिए लग्न वाटिका ही रात काटने का ठिकाना बन गई है।
महारापारा और डोंगा घाट के बाद छेपड़ागुड़ा की तस्वीर भी कम दर्दनाक नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक यहां करीब 600 एकड़ धान की फसल बर्बाद हुई है। लक्ष्मण कश्यप बताते हैं कि सुबह करीब 4 बजे पानी घरों में घुसना शुरू हुआ। देखते ही देखते खेत भी पानी में डूब गए। उनकी करीब 1.30 एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई।