CG Weather Update: परलकोट और मयाना में जलभराव डेड लेबल पर हैं, वहीं पर कोसारटेडा जलाशय में 26 फीसदी पानी है। इस मानसून अल्पवर्षा के कारण इन जलाशयों में अब तक पानी की धार भी पहुंचना शुरू नहीं हुआ है...
CG Weather News: आषाढ़ बीतने को है, लेकिन बस्तर संभाग के परलकोट, कोसारटेडा और मयाना जलाशय में गर्मीयों के जैसे हालात हैं। परलकोट और मयाना में जलभराव डेड लेबल पर हैं, वहीं पर कोसारटेडा जलाशय में 26 फीसदी पानी है। इस मानसून अल्पवर्षा के कारण इन जलाशयों में अब तक पानी की धार भी पहुंचना शुरू नहीं हुआ है। पिछले साल जुलाई माह में जलाशय लबालब हो जाते थे। जलाशय से पानी छोड़ना पड़ता था। वहीं अब आषाढ़ बीतने को है, लेकिन संभाग के किसी भी जिले में मुसलाधार बारिश नहीं हुई है। इसका असर नदी-नालों और जलाशयों पर पड़ रहा है।
Chhattisgarh News: जलाशयों की खराब स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां परलकोट जलाशय से कांकेर जिले के लिए भी पानी नहीं निकाला जा सकता। कोसारटेडा जलाश्य से 26 गांव के किसानों को खरीफ सीजन में 5140 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा पानी उपलब्ध होती है। वहीं पर कांकेर के परलकोट जलाशय से खरीफ और रबी फसल में 7280 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।
Chhattisgarh rains: गर्मीयों के सीजन में कोसारटेडा जलाशय से 23 तालाब और परलकोटर से 41 तालाबों में पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस मानसून के हालात को अब केवल आषाढ़ के अंत समय में अच्छी बारिश का इंतजार है। कोसारटेडा में जलभराव की कुल क्षमता 63.690 मिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि अब तक केवल 15.98 मिलियन क्यूबिक मीटर भराव हुआ है। वहीं परलकोट कुल क्षमता 63.550 मिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि जलराव बिलो एलएसएल (डेड लेवल) पर है। बस्तर में 1 जून से अब तक 473.6 एमएम बाशि हुई है, जबकि कांकेर जिले में 261.0 एमएम बारिश हुई, जो कि मौसम विभाग के औसत अनुमान से काफी कम है।
जिले को पानी देने वाले जलाशय खाली हैं। अब पेयजल के लिए पानी नहीं निकाला जा सकता। ऐसे में आगे 15 दिन बारिश नहीं हुई तो जलसंकट की स्थिति निर्मित होगी। मैदानी इलाकों के भाठा और अपलैंड में खेत सूखने लगे हैं। सोनारपाल के भरत बघेल ने बताया कि उनके पास करीब 11 एकड़ खेत हैं। इनके कुछ हिस्से मैदान से लगे हैं। जल्द झमाझम बारिश नहीं हुई तो यहां बियासी संभव नहीं होगा।
जल संसाधन विभाग के ईई करण भंडारी ने बताया कि जलाशयों में पानी का भराव शुरू नहीं हुआ है। अभी कैचमेंट में इतना पानी नहीं गिरा है कि नदी-नालों में पानी का बहाव शुरू हो सके। जल्द बारिश के साथ ही जलाशयों में पानी की आवक की उम्मीद है।