जगदलपुर

Chhattisgarh Naxal News: पूर्व नक्सलियों की सियासी एंट्री की तैयारी, राधाक्का के अंतिम संस्कार में दिखी राजनीतिक हलचल

Naxal News: अंतिम संस्कार में जुटे दिग्गजों के बीच पूर्व नक्सलियों की सियासी एंट्री के संकेत मिले। भाकपा माओवादी से प्रतिबंध हटाने की मांग भी उठी।
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Sep 09, 2026
Chhattisgarh Naxal News
महिला नक्सली नेता राधाक्का के अंतिम संस्कार में दिखी राजनीतिक हलचल (Photo Patrika)

Bastar Naxal News: पांच दशक से भी ज्यादा समय तक दंडकारण्य के जंगलों में बंदूक के साए में नक्सली आंदोलन का हिस्सा रहे नेताओं की कहानी अब एक नया मोड़ लेती दिखाई दे रही है। कभी भूमिगत रहकर सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करने वाले कुछ पूर्व नक्साली नेता अब लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर अपनी दूसरी राजनीतिक पारी शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। तेलंगाना के आदिलाबाद में रविवार को पूर्व महिला नक्सली नेता राधाक्का के अंतिम संस्कार में जुटे पुराने और वरिष्ठ चेहरों ने जनता के लिए काम करने और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ने की बात दोहराई। इस दौरान नक्सली नेता देवजी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों से उनकी मांग है कि उनके मूल संगठन भाकपा (माओवादी) से प्रतिबंध हटाया जाए, ताकि वे और उनके कई साथी इसी बैनर तले चुनाव लड़ सकें।

चंद्रन्ना ने पांच दशक बाद छोड़ा जंगल

नक्सली केंद्रीय कमेटी के पूर्व वरिष्ठ नेता पुल्लुरी प्रसादराव उर्फ चंद्रन्ना और उनकी पत्नी राधाक्का करीब चार दशकों तक दंडकारण्य के जंगलों में सक्रिय रहे। चंद्रन्ना ने पिछले साल तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक के सामने आत्मसमर्पण कर अपने पैतृक गांव वापसी की थी। अब उनकी पत्नी राधाक्का की बीमारी के बाद आदिलाबाद के अस्पताल में हार्ट अटैक से मौत हो गई। पैतृक गांव लिंगुगुडा में अंतिम संस्कार के दौरान चंद्रन्ना समेत पुराने नक्सली नेताओं की मौजूदगी ने दशकों पुराने आंदोलन की यादें फिर ताजा कर दीं।

अंतिम संस्कार में जुटे कई पुराने चेहरे

राधाक्का की अंतिम विदाई में देवजी, संजीव, दामोदर और गजरला अशोक समेत 50 से अधिक पूर्व नक्सली नेता पहुंचे। साथ ही नागरिक अधिकार संगठनों, लेखकों, कवियों और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग भी मौजूद रहे। लाल झंडों, क्रांतिकारी गीतों और नारों के बीच अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। मुख्यधारा में वापसी के बाद भी इन नेताओं का एक साथ दिखना यह दर्शाता है कि उनके पुराने सामाजिक और संगठनात्मक रिश्ते आज भी कायम हैं।

संगठन से प्रतिबंध हटाने की मांग

पत्रकारों से बातचीत में पूर्व नक्सली नेता देवजी ने जनता के बीच काम करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार भाकपा (माओवादी) पर से प्रतिबंध हटाती है, तो वे सीधे अपने संगठन के बैनर तले चुनाव लड़ने को तैयार हैं। के बाद पूर्व नक्सली की नई भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच देवजी का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक जमीन और पुराने आधार की तलाश

सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नेताओं के बीच राजनीतिक भविष्य को लेकर अब तक दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं। ये नेता अपने पुराने प्रभाव वाले इलाकों में राजनीतिक आधार तलाशने और विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क साधने की कोशिश में हैं। हालांकि, अभी किसी भी पूर्व माओवादी नेता ने चुनाव लड़ने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर चुनावी संभावनाएं तलाशने की कवायद तेज हो गई है।

Updated on:
09 Sept 2026 08:14 am
Published on:
09 Sept 2026 08:14 am