Durga Puja 2023 : आचार संहिता की पाबंदियों के दायरे में इस साल दंतेवाड़ा जाने वाले माता के पदयात्री भक्त भी हैं।
जगदलपुर। Durga Puja 2023 : आचार संहिता की पाबंदियों के दायरे में इस साल दंतेवाड़ा जाने वाले माता के पदयात्री भक्त भी हैं। उन्हें इस साल जगदलपुर से दंतेवाड़ा के बीच बेहद सीमित सुविधा केंद्र मिलेंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि बस्तर जिला प्रशासन ने आचार संहिता के बीच संघ-संगठनों को सुविधा केंद्र के लिए सुविधा देने से मना कर दिया है। ऐसी स्थिति में सीमित संसाधन वाले संघ-संगठनों ने सुविधा केंद्र स्थापित करना स्थगित कर दिया है। जगदलपुर से दंतेवाड़ा के बीच फिलहाल दो ही सुविधा केंद्र शुरू हो पाए हैं।
पहला सुविधा केंद्र पदयात्रियों को पंडरीपानी में मिलेगा जिसे हनुमंत राव एंड ग्रुप ने शुरू किया है। वहीं दूसरा केंद्र केशलूर में चेंबर ने शुरू किया है। इसके बाद कोई सुविधा केंद्र रविवार को नवरात्र के पहले दिन तक शुरू नहीं हो पाया था। बताया जा रहा है कि आगे भी कोई केंद्र शुरू हो पाए इसकी संभावना कम है।
हालांकि केशलूर के आगे के कुछ सेवाभावियों का कहना है कि वे अपने घर-दुकान के बाहर सीमित व्यवस्था के साथ माता के भक्तों की सेवा करेंगे। भक्तों को ठहरने और भोजन की व्यवस्था केशलूर के आगे मिलने की संभावना फिलहाल कम है। सुविधा केंद्र स्थापित करने वाली समितियों का कहना है कि पंडरीपानी और केशलूर में तो उनकी ओर से व्यवस्था कर दी गई है लेकिन आगे की व्यवस्था पदयात्री साथ लेकर चलें।
60 किमी के दायरे में फिलहाल दो ही सेवा केंद्र
जगदलपुर से दंतेवाड़ा के बीच बस्तर जिले की सीमा जहां खत्म होती है, वहां तक 60 किमी के दायरे में फिलहाल दो ही सेवा केंद्र तैयार बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले साल 60 किमी के दायरे में कुल 18 सेवा केंद्र संचालित हो रहे थे। इसके अलावा ग्रामीणों और पंचायतों ने भी अलग से व्यवस्था कर रखी थी। इस बार ऐसा नहीं होने की वजह से यात्रा शुरू करने वाले यात्रियों की परेशानी काफी बढऩे वाली है। हालांकि बस्तर जिले के बाद बंजारीन घाट से ही सुविधा केंद्र मिलने लगेंगे। दंतेवाड़ा जिले में वहां के जिला प्रशासन के सहयोग से 15 सेवा केंद्र स्थापित हुए हैं। जहां बस्तर के पदयात्रियों को ठहने और नाश्ते-भोजन के अलावा हर तरह की सुविधा मिल पाएगी।
जगदलपुर के अलावा कोण्डागांव और ओडिशा के यात्री आगे बढ़े
भले ही इस बार सुविधा केंद्रोंं की संख्या कम है लेकिन पदयात्रियों का उत्साह कम नहीं हुआ है। पहले दिन ही दंतेवाड़ा जाने वाले पदयात्रियों की बड़ी संख्या दंतेवाड़ा मार्ग पर दिखाई दी। पत्रिका की टीम को परपा के आगे कुल छह जत्थे मिले जो जगदलपुर के अलावा कोण्डागांव और ओडिशा के नवरंगपुर के थे। पदयात्रियों का कहना था कि सेवा केंद्र की व्यवस्था हर साल होती है तो इस साल भी होनी चाहिए थी इस व्यवस्था से चुनाव का क्या वास्ता है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन जब व्यवस्था में सहयोग कर सकता है तो बस्तर को भी सहयोग करना चाहिए था।
कोई पंचायत या पंचायत प्रतिनिधि सहयोग नहीं कर पाएगा
आचार संहिता की तय पाबंदियों की वजह से कोई भी पंचायत पदयात्रियों की मदद नहीं कर पाएगा। पंचायत प्रतिनिधि भी सीधे तौर पर पदयात्रियों की सेवा से नहीं जुड़ पाएंगे। बस्तर जिला प्रशासन ने जो गाइड लाइन तय की है उसके अनुसार धार्मिक आयोजन में राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए। ऐसी स्थिति में पंचायतों ने सेवा देने से अपने हाथ खींच लिए हैं क्योंकि पंचायतों में भी चुने हुए ही प्रतिनिधि हैं।