जगदलपुर

बस्तर में जल प्रलय: पत्रिका टीम ने बोट से पहुंचकर 500 ग्रामीणों को राहत शिविरों तक पहुंचाया

Chhattisgarh News: ओडिशा के बांध से पानी छूटने से विकराल स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे संकट के समय 'पत्रिका' की टीम मोटरबोट से लाइफ जैकेट पहनकर प्रभावित इलाकों में पहुंची और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला..
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Indrawati river, chhattisgarh Heavy rain
ओडिशा के बांध से पानी छूटने से विकराल नदी का विकराल रूप ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh Heavy Rain: घर छोड़ना किसी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन जब पानी दरवाजे तक पहुंच जाए और आंगन डूबने लगे, तो सवाल घर का नहीं जिंदगी बचाने का हो जाता है। बस्तर में बाढ़ के तीसरे दिन सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में यही मंजर दिखा। ओडिशा के खातिगुड़ा डैम से छोड़े गए पानी के कारण छत्तीसगढ़ के इंद्रावती का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे नदीबोड़ना, बेलगांव, रामपाल और भेजापदर गांव पूरी तरह टापू बन गए।

Chhattisgarh News: बाढ़ ने घेरा तो समझ में आया कि अब घर नहीं, जिंदगी जरूरी

शुरुआत में ग्रामीण सामान और आशियाने के मोह में गांव छोड़ने को तैयार नहीं थे। ऐसे संकट के समय 'पत्रिका' की टीम मोटरबोट से लाइफ जैकेट पहनकर प्रभावित इलाकों में पहुंची। टीम ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर न केवल लोगों को बढ़ते खतरे के प्रति समझाया, बल्कि उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए बड़ा अभियान चलाया। इस दौरान 500 से अधिक बाढ़ पीड़ितों को राहत शिविरों तक पहुंचाया गया और उन्हें भोजन व पेयजल का वितरण किया गया। ग्रामीणों को यह समझाना सबसे कठिन चुनौती थी कि घर दोबारा बन सकता है, लेकिन जिंदगी वापस नहीं आती। आखिरकार बढ़ते पानी के बीच ग्रामीणों ने सुरक्षा का रास्ता चुना।

भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से मदद

बस्तर संभाग में इंद्रावती नदी रौद्र रूप में आ गई। शनिवार रात नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 4.26 मीटर ऊपर (12.56 मीटर) पहुंच गया। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जगदलपुर के पास स्थित डोंगा घाट में फंसे 10 लोगों को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया। संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। धमतरी शहरी क्षेत्र के सोरिद वार्ड में रविवार शाम 4 बजे एक 8 साल का बच्चा गिर गया। बच्चे के नाले में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। एसडीआरएफ बच्चे की तलाश कर रही है। अबतक बच्चा नहीं मिला है।

भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से मदद

दुर्ग संभाग: 1.11 लाख एकड़ फसल जलमग्न

बाढ़ से किसानों को सर्वाधिक क्षति दुर्ग संभाग में हुई है, जहां करीब 1.11 लाख एकड़ फसल पानी में डूब गई। इसमें बालोद में 32 हजार एकड़, बेमेतरा में 22 हजार, कवर्धा-राजनांदगांव में 28 हजार, मोहला-मानपुर में 15 हजार और दुर्ग जिले में 14 हजार एकड़ फसल प्रभावित हुई है। धान में बालियां न आने से बड़ा नुकसान टल गया है, फिर भी फसलों में 22 से 25 प्रतिशत (सब्जी में 40-50% और धान में 15-20%) क्षति का अनुमान है।

सक्ती और जांजगीर-चांपा: शिवरीनारायण बना टापू, फंसे ग्रामीणों का बचाव

गंगरेल बांध से 2.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद महानदी के उफान से शिवरीनारायण टापू बन गया। सक्ती जिले के डभरा क्षेत्र अंतर्गत मांजरखुर्द के टापू पर फंसे 6 ग्रामीणों को कलेक्टर जयश्री जैन और एसपी प्रफुल्ल ठाकुर की मौजूदगी में रेस्क्यू किया गया। वहीं जांजगीर के खरौद स्थित वार्ड 13 में 5 फीट पानी भरने पर 75 लोगों को सुरक्षित विस्थापित किया गया।

धमतरी व रायगढ़: हादसों में महिला की मौत, तीन लापता

धमतरी के 17 गांवों में पानी घुसने से 10 कच्चे मकान गिर गए और 13 हजार एकड़ से अधिक फसल डूब गई। यहां 54 लोगों को रेस्क्यू कर 220 से अधिक ग्रामीणों को राहत शिविरों में रखा गया है। धमतरी में दो लोगों के बहने की आशंका है। वहीं रायगढ़ के नंदेली में जर्जर दीवार गिरने से एक महिला की मौत हो गई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

Updated on:
28 Sept 2026 10:40 am
Published on:
28 Sept 2026 10:40 am