Bastar Monsoon Impact: जगदलपुर में बारिश से गर्मी से राहत मिली, लेकिन लगातार बिजली कटौती और शटडाउन से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
Bastar Monsoon Impact: जगदलपुर जिले में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर दी है, लेकिन इसके साथ ही बिजली व्यवस्था की बदहाली ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी है। शहर की कई कॉलोनियों में बार-बार शटडाउन और ग्रामीण क्षेत्रों में मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली कटौती से लोग खासे परेशान हैं। धरमपुरा, कुम्हारपारा, पनारा पारा, नयामुंडा सहित मुख्य मार्ग जैसश्कई इलाके में बिना पूर्व सूचना बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। इससे घरों, दुकानों और छोटे व्यवसायों पर सीधा असर पड़ रहा है।
बिजली गुल होने से शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। कई गांवों में मेंटेनेंस कार्य का हवाला देकर घंटों तक बिजली बंद रखी जा रही है, जिससे ग्रामीणों को दैनिक कार्यों, पेयजल आपूर्ति, खेती-किसानी और छोटे घरेलू उपकरणों के उपयोग में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शहर से सटे आड़ावाल, मगडू कचोरा, धुरगुड़ा और कलचा सहित बस्तर के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी अघोषित रूप से बिजली कटौती हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश शुरू होते ही बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है, जबकि हर साल मेंटेनेंस और सुधार के दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद न तो कटौती की समस्या कम हो रही है और न ही उपभोक्ताओं को समय पर कोई स्पष्ट सूचना मिल पा रही है।
इन दिनों हो रही बोर्ड कक्षाओं और स्कूल-कॉलेजों की परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को भी बिजली कटौती से पढ़ाई बाधित हो रही है। यह समस्या रात में और बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि बार-बार हो रही शटडाउन व्यवस्था में सुधार किया जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में मेंटेनेंस कार्य को व्यवस्थित और समयबद्ध बनाया जाए तथा बिजली कटौती से पहले उपभोक्ताओं को सूचना देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
Bastar Monsoon Impact: जगदलपुर सहित पूरे बस्तर अंचल में हर साल गर्मी और बारिश के मौसम में बिजली आपूर्ति की समस्या एक प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आती है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां—घने जंगल, दूरस्थ गांव और लंबी वितरण लाइनें—बिजली व्यवस्था को संवेदनशील बनाती हैं, जिससे मौसम बदलते ही आपूर्ति प्रभावित होने लगती है।
बारिश के दौरान पेड़ गिरना, लाइनों में फॉल्ट और ट्रांसफार्मर की खराबी आम कारण होते हैं, जिनके चलते शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बार-बार शटडाउन लेना पड़ता है। हालांकि बिजली विभाग द्वारा हर साल प्री-मानसून मेंटेनेंस और सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर सीमित ही नजर आता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण रहती है, जहां बिजली आपूर्ति पहले से ही सीमित समय के लिए होती है। ऐसे में मेंटेनेंस के नाम पर लंबी कटौती से पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, छोटे घरेलू उद्योग और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होते हैं। बस्तर के कई गांवों में अब भी बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और आधुनिक वितरण प्रणाली की जरूरत महसूस की जा रही है।