जयपुर

Rajasthan Budget 2026: नागौर, हनुमानगढ़, बारां समेत 10 जिलों की बड़ी मांगें

‘राजस्थान पत्रिका’ ने प्रदेश के जिलों से जुड़ी जमीनी जरूरतों, प्रमुख मांगों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन सुझावों को संकलित कर राज्य सरकार के समक्ष रखने का प्रयास किया है।

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Jan 20, 2026
Rajasthan Budget 2026 District-Wise Demands (Photo: Patrika)

Rajasthan Budget 2026-27: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र से पहले राज्य सरकार बजट की रूपरेखा तय करने में जुटी है। इसी बीच ‘राजस्थान पत्रिका’ ने प्रदेश के जिलों से जुड़ी जमीनी जरूरतों, प्रमुख मांगों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन सुझावों को संकलित कर राज्य सरकार के समक्ष रखने का प्रयास किया है। सामने आया है कि कहीं प्रशासनिक ढांचे की मजबूती की मांग है तो कहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, उद्योग और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे प्राथमिकता में हैं। यदि बजट में इन मांगों को स्थान मिलता है तो विकास को नई दिशा मिल सकती है।

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नागौर: मिनी सचिवालय के लिए बजट

सुझाव: नागौर में 151 बीघा भूमि पर प्रस्तावित मिनी सचिवालय के लिए बजट जारी किया जाए। इससे करीब 38 सरकारी कार्यालय एक परिसर में आ सकेंगे। वर्तमान में कार्यालय 5-7 किमी की दूरी पर फैले हैं और कई किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं।

नागौर में विश्वविद्यालय

सुझाव: नागौर व डीडवाना-कुचामन में 29 सरकारी और 134 निजी कॉलेजों के करीब दो लाख विद्यार्थियों को अजमेर जाना पड़ता है। नागौर में विश्वविद्यालय स्थापित होने से छात्रों और कॉलेज प्रशासन को राहत मिलेगी।

बीकानेर: धार्मिक पर्यटन सर्किट

सुझाव: करणी माता, मुकाम, कोलायत, कोडमदेसर, लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित प्रमुख स्थलों को लिंक रोड के जरिए एक पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण विकास, रोजगार और यातायात व्यवस्था में सुधार होगा।

बीकानेर: मिनी सचिवालय

सुझाव: शहर की परिधि में उपलब्ध सरकारी भूमि पर मिनी सचिवालय निर्माण के लिए बजट दिया जाए। जर्जर भवनों से राहत मिलेगी।

सीकर नगर निगम

सुझाव: आबादी और क्षेत्रफल के मानकों को देखते हुए सीकर को नगर निगम का दर्जा दिया जाए। इससे शहरी विकास को गति मिलेगी।

सीकर यमुना का पानी

सुझाव: यमुना जल परियोजना के पहले चरण के लिए बजट जारी कर डीपीआर तैयार कराई जाए। हर आम चुनाव में यहां बड़ा चुनावी मुद्दा रहता है।

झुंझुनूं: ड्रेनेज व्यवस्था

सुझाव: वैज्ञानिक ड्रेनेज मास्टर प्लान बनाकर चरणबद्ध बजट आवंटन किया जाए। जलभराव वाले प्रमुख क्षेत्रों की पहचान कर कार्य शुरू किया जाए।

झुंझुनूं: लोहार्गल का विकास

सुझाव: सड़क चौड़ीकरण, रोप-वे, सौंदर्यकरण और परिक्रमा मार्ग के विकास से धार्मिक पर्यटन और रोजगार बढ़ेगा। 24 कोसीय परिक्रमा और लक्खी मेले में यहां 20-25 लाख श्रद्धालु जुटते हैं। हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जाए।

हनुमानगढ़: सतीपुरा आरओबी

सुझाव: प्लस डिजाइन के अनुरूप ओवरब्रिज का उपयोग सुनिश्चित कर निर्माण जल्द पूरा किया जाए। 18 माह में काम पूरा होना था, लेकिन 7 साल से चल रहा है।

हनुमानगढ़: सहकारी स्पिनिंग मिल व एग्रो फूड पार्क

सुझाव: बंद पड़ी स्पिनिंग मिल को शुरू किया जाए और घोषित एग्रो फूड पार्क को धरातल पर उतारा जाए।

श्रीगंगानगर: एकीकृत मिनी सचिवालय

सुझाव: 25 बीघा भूमि पर प्रथम चरण में 40 करोड़ जारी कर निर्माण शुरू किया जाए। जिससे परियोजना धरातल पर उतर सके।

श्रीगंगानगर: सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कॉलेज

सुझाव: जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से जोड़कर ट्रॉमा व सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं विकसित की जाएं। रेफरल सिस्टम और एम्बुलेंस नेटवर्क मजबूत किया जाए।

बारां: रिंग रोड

सुझाव: मेगा हाईवे व एनएच को बाइपास के रूप में विकसित कर शहर को जाम और हादसों से राहत दी जाए। इसके बनने से वाहन शहर के बाहर से निकलने लगेंगे।

बारां: औद्योगिक इकाइयां

सुझाव: जिले में कृषि तथा औषधि आधारित बड़ी व छोटी इकाइयों, आयुर्वेदिक दवा बनाने के प्लांट के लिए छूट देकर कंपनियों को आकर्षित किया जा सकता है। तीन नदियां होने से पानी की कोई कमी नहीं है।

बूंदी: पर्यटन विकास

सुझाव: रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को पर्यटन सर्किट में शामिल कर सुविधाएं बढ़ाई जाएं। पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा सकता है।

बूंदी: सैंड स्टोन उद्योग पैकेज

सुझाव: सैंड स्टोन उद्योग के लिए विशेष पैकेज जारी कर वर्षभर रोजगार सुनिश्चित किया जाए। सैंड स्टोन की 639 लीज हैं, लेकिन अधिकांश बंद हैं।

कोटा: चंबल शुद्धिकरण

सुझाव: 150 एमएलडी क्षमता के 6-7 एसटीपी के लिए बजट आवंटित किया जाए। चंबल नदी कोटा की लाइफ लाइन है, नदी में 18 नालों का गंदा पानी गिरता है।

कोटा: ट्रेंचिंग ग्राउंड शिफ्ट

सुझाव: कचरा निस्तारण के लिए नया स्थान चिन्हित कर बजट में घोषणा की जाए। यहां शहरभर का कचरा डालने से पहाड़ खड़ा हो गया है।

पालीः टेक्सटाइल प्रदूषण समाधान

सुझाव: पाली से कच्छ के रण तक पाइपलाइन परियोजना के लिए दीर्घकालीन बजट योजना बनाई जाए। टेक्सटाइल उद्योग जिले के आर्थिक विकास की रीढ़ है।

पालीः बांडी नदी पर फोरलेन पुलिया

सुझाव: 36 करोड़ की स्वीकृत राशि के तहत रुके कार्य को पुनः शुरू किया जाए। पुरानी पुलिया जर्जर हो चुकी है। जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

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