
जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े बच्चों के अस्पताल में रविवार को इलाज में लापरवाही सामने आई। पेट दर्द से बीमार बच्ची को अस्पताल लाए परिजनों को इमरजेंसी में डॉक्टरों ने संडे होने की बात कहकर जांच और इलाज से मना कर दिया। इमरजेंसी के स्टॉफ ने सिर्फ भर्ती मरीजों के इलाज की बात कही और एक टेबलेट देकर घर भेज दिया। फिर बच्ची की तबियत बिगड़ गई। परिजन फिर बच्ची को अस्पताल लेकर आए, यहां चिकित्सकों ने उसे देखा तो इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई।
मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट गया और परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। परिजनों ने डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ पर गुस्सा उतारा और गाली-गलौच तक कर डाली। बच्ची की मां बेहोश हो गई। हंगामा बढ़ता देख मोतीडूंगरी पुलिस मौके पहुंची। परिजन दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। थानाधिकारी प्रदीप यादव ने अस्पताल अधीक्षक से बात की और मामले से अवगत कराया।
तो शायद बच जाती बेटी की जान...
पिता मुहम्मद साजिद ने बताया कि बेटी साहिदा बानो (9) स्वस्थ थी। रविवार को अचानक पेट में दर्द हुआ और 11 बजे अस्पताल लाए थे। डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया। परिजनों ने कहा कि डॉक्टरों ने रविवार की छुट्टी की बात कहकर इलाज नहीं किया और घर भेज दिया। वहां बेटी को डॉक्टरों द्वारा लिखी दवाई दी तो उल्टियां करने लगी और हालत बिगड़ गई। दोपहर एक बजे अस्पताल लाए जहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
अस्पताल अधीक्षक ने झाड़ा पल्ला
इस मामले में अस्पताल अधीक्षक अशोक गुप्ता का कहना है कि परिजन बच्ची को अस्पताल लेकर आए थे, तब बच्ची के पेट में दर्द था। हो सकता हैं बच्ची की स्थिति गंभीर नहीं लगी होगी। इसीलिए उसे घर भेज दिया। ऐसा नहीं है कि संडे को भर्ती नहीं कर करते। रविवार को 56 मरीज भर्ती हुए हैं। परिजनों से शिकायत ली गई है। सोमवार को सीसीटीवी फुटेज देख मामले की जांच की जाएगी। इधर थानाधिकारी प्रदीप यादव ने बताया कि इस मामले में किसी प्रकार की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है।