जयपुर

Jaipur RTO Action: बस में बैठने से पहले जरा ठहरिए… कहीं आपकी सीट के आगे भी बंद हो ‘बचने का रास्ता’?

अगली बार जब आप परिवार या श्रद्धालुओं के साथ स्लीपर बस में सफर करने जा रहे हों, तो एक बार यह जरूर देख लें कि आपकी सीट के सामने इमरजेंसी गेट खुला है या नहीं?
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Jul 12, 2026
Jaipur RTO Sleeper Bus Action
बस में इमरजेंसी गेट गायब और डिग्गी में बाइक। फोटो: पत्रिका

जयपुर/चौमूं। अगली बार जब आप परिवार या श्रद्धालुओं के साथ स्लीपर बस में सफर करने जा रहे हों, तो एक बार यह जरूर देख लें कि आपकी सीट के सामने इमरजेंसी गेट खुला है या नहीं, छत का आपातकालीन निकास बंद तो नहीं कर दिया गया और बस की गैलरी इतनी चौड़ी तो है कि हादसे की सूरत में आप बाहर निकल सकें। क्योंकि शनिवार को जयपुर जिले में हुई कार्रवाई ने साबित कर दिया कि सड़क पर दौड़ रही तमाम बसें बॉडी कोड 119/52 के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं और यात्री की जान को लेकर कितनी लापरवाही से दौड़ रही हैं।

जयपुर-सीकर रोड पर टाटियावास टोल पर परिवहन विभाग ने विशेष अभियान चलाकर बॉडी कोड 119/52 का उल्लंघन करने वाली 10 स्लीपर बसें सीज कर डीटीओ कार्यालय चौमूं परिसर में खड़ी करा दीं। इन बसों में क्षमता से ज्यादा सीटें थीं, बस की बॉडी से छेड़छाड़ की गई थी और गैलरी बेहद संकरी थी। परिवहन निरीक्षक अरविंदसिंह राठौड़ और रजत माथुर ने उदयपुरिया मोड़ स्थित एचएनएस बस बॉडी बिल्डर के कारखाने पर आकस्मिक छापा मारा।

यहां बॉडी कोड 119/52 की पालना न करने पर पांच निर्माणाधीन बसों को मौके पर ही डिटेन कर दिया गया यानी सड़क पर उतरने से पहले ही आपकी जान का जोखिम कारखाने में तैयार हो रहा था। इस पूरी कार्रवाई में परिवहन विभाग ने बस संचालकों पर करीब 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया, जबकि 5 बसों में मौके पर ही मानकों के अनुरूप संशोधन कराया गया।

खाटूश्यामजी जा रहे श्रद्धालुओं के साथ जो हुआ

अजमेर रोड पर मध्यप्रदेश के खरगोन से खाटूश्यामजी दर्शन जा रहे 45 श्रद्धालुओं की बस रोकी गई तो हकीकत और डरावनी निकली। इमरजेंसी गेट के ठीक सामने तीन स्लीपर सीटें बना दी गई थीं, छत का आपातकालीन निकास स्थायी रूप से बंद था और डिक्की में यात्रियों के सामान की जगह करीब दो टन व्यावसायिक माल और एक मोटरसाइकिल भरी मिली। रोकने का इशारा मिलने पर चालक बस को दो किलोमीटर तक दौड़ाता रहा। अवैध अल्ट्रेशन पर एक लाख रुपए और अन्य उल्लंघनों पर 22 हजार रुपए यानी 1.20 लाख रुपए का चालान काटा गया।

दलाल को दिए आठ हजार

इस कार्रवाई में उलझकर श्रद्धालु दिनभर सड़क किनारे भूखे-प्यासे बैठे रहे, महिलाओं-बच्चों के लिए पानी और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं थी। चालक अर्जुन का दावा है कि सारे दस्तावेज पूरे थे, फिर भी चालान जमा कराने में शाम पांच बज गए और रसीद कटवाने के लिए एक दलाल को आठ हजार रुपए तक देने पड़े। उसने 181 हेल्पलाइन और पुलिस से भी शिकायत की, पर राहत नहीं मिली। खरगोन की आरती पाटीदार ने कहा कि राजस्थान की जो छवि सुनी थी, इस घटना ने वह तोड़ दी। आरटीओ का कहना है कि यात्रियों के लिए वैकल्पिक बस मंगाई गई थी, लेकिन चालक ने ही उन्हें उसमें बैठने नहीं दिया।

बस में बैठने से पहले खुद जांच लें ये बातें

  • सीट या स्लीपर के ठीक सामने इमरजेंसी गेट है, तो सतर्क हो जाएं। यह नियम विरुद्ध है।
  • छत पर बना इमरजेंसी एग्जिट खुला और उपयोग योग्य हो।
  • बस की गैलरी में सामान या अतिरिक्त सीट न हो।
  • फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स और इमरजेंसी हैमर बस में मौजूद रहे।
  • दरवाजे-खिड़कियां बिना अवरोध आसानी से खुलें।
  • बस पर फिटनेस, परमिट और स्वीकृत यात्री क्षमता साफ अंकित हो।

पत्रिका व्यू: परमिट किेसने दिया?

सवाल जुर्माने का नहीं, परमिट का है। जिन बसों में बॉडी कोड की खुलेआम धज्जियां उड़ीं, उन्हें सड़क पर उतरने की इजाजत आखिर किसने दी? क्या तब फिटनेस जांचने वाली आंखें बंद थीं या जानबूझकर मूंद ली गईं? इमरजेंसी गेट के सामने सीटें और बंद निकास जैसी खामियां रातोंरात पैदा नहीं होतीं। ये परमिट देने वाले हर हस्ताक्षर की मिलीभगत बताती हैं। एक दिन की चौकसी से 15 बसें पकड़ी गईं, तो बाकी दिन विभाग किस नींद में सोता है? जब तक परमिट देने वालों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक हर जांच महज दिखावा है और हर यात्री की जान भगवान भरोसे।

Updated on:
12 Jul 2026 08:37 am
Published on:
12 Jul 2026 08:37 am
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