जयपुर

Jaipur: कानोता-चंदलाई-नेवटा बांध पर डे-नाइट टूरिज्म, बोटिंग-ग्रीन लैंड बनेंगे, 15 फरवरी तक DPR तैयार

Rajasthan eco tourism project: जयपुर जिले में कानोता, चंदलाई और नेवटा बांधों को शहर के नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी है। जल संसाधन विभाग ने काम शुरू कर दिया है और तीनों बांधों के पानी को साफ करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करा रहा है।

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Feb 01, 2026
बांधों से पानी के सैंपल लेते वैज्ञानिक, पत्रिका फोटो

Rajasthan eco tourism project: जयपुर जिले में कानोता, चंदलाई और नेवटा बांधों को शहर के नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी है। जल संसाधन विभाग ने काम शुरू कर दिया है और तीनों बांधों के पानी को साफ करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करा रहा है।

सैर-सपाटा, बोटिंग, डे-नाइट, ग्रीन लैंडस्केप से पर्यटक आकर्षित होंगे। तीनों बांधों का पानी सीसे की तरह साफ सुथरा होगा और पर्यटकों को गंदे पानी की बदबू भी परेशान नहीं करेगी। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 15 फरवरी तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार हो जाएगी और उसी आधार पर पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ाया जाएगा।

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पानी के सैंपल लिए, ड्रोन सर्वे पूरा

कानोता, चंदलाई और नेवटा बांधों के पानी को साफ करने के प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने वाली फर्म से जुडे वैज्ञानिकों ने तीनों बांधों के पानी और आस-पास के नालों से बांधों तक आ रहे पानी के सैंपल लिए हैं। वहीं बांधों का ड्रोन सर्वे कर गंदे पानी के नालों के स्रोत की जीआई मैपिंग भी कर ली है।

जिससे भविष्य में इन नालों से बांधों में पहुंच रहे पानी को पुख्ता तरीके से रोका जा सके। इसके साथ ही जैव विविधता संरक्षण, जल उपचार की आधुनिक तकनीकों व स्थानीय आजीविका सृजन और पर्यावरण पर्यटन की संभावनाओं को भी देखा जाएगा।

तीन नए इको टूरिज्म डेस्टिनेशन

पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तीनों बांध नए इको टूरिज्म डेस्टिनेशन होंगे। कानोता बांध पर पर्यटन बढाने के लिए कुछ विकास कार्य भी कराए गए थे और पर्यटक वहां पहुंचने भी लगे थे। लेकिन लेकिन बांध से उठने वाली गंदे पानी की बदबू के कारण कुछ समय बाद पर्यटकों के कदम ठिठक गए और अब पर्यटकों की संख्या लगभग शून्य हो गई है।

अफसर ये बोले

कानोता, चंदलाई और नेवटा बांधों के पानी को साफ कराने और पर्यटन से जुडी गतिविधियां शुरू करने के लिए डीपीआर तैयार कराई जा रही है। उम्मीद है कि 15 फरवरी तक डीपीआर तैयार हो जाएगी और फिर इसमें सुझाए गए तरीकों के आधार पर ही तीनों बांधों के पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा।

अनिल थालौर, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग,जयपुर

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