जयपुर

राजस्थान में 48 लाख ‘लावारिस’ बैंक खाते! 3120 करोड़ रुपए का कोई दावेदार नहीं; ऐसे कर सकते हैं रकम के लिए दावा

भारतीय रिजर्व बैंक की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के बैंकों में 10 साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय खातों की संख्या 48 लाख 12 हजार से अधिक है।
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Aug 18, 2026
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निष्क्रिय खातों की संख्या 48 लाख 12 हजार से अधिक। फोटो: एआई

अरुण कुमार

जयपुर। राजस्थान के लाखों लोग बैंकों में जमा अपनी गाढ़ी कमाई भूल गए हैं या उनके उत्तराधिकारी इस जमा पूंजी से अनजान है। भारतीय रिजर्व बैंक की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के बैंकों में 10 साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय खातों की संख्या 48 लाख 12 हजार से अधिक है। इनमें करीब 3,120 करोड़ 45 लाख रुपए जमा है, जिन पर लंबे समय से कोई दावेदार नहीं आया। इस खजाने में सबसे बड़ी हिस्सेदारी उन खातों की है, जिनके खाताधारकों की मृत्यु के बाद नॉमिनी को खाते की जानकारी नहीं रही।

वित्तीय साक्षरता की कमी और पुराने खातों में अधूरे केवाईसी दस्तावेज भी इसकी वजह है। कुल निष्क्रिय खातों में करीब 62% यानी करीब 29.83 लाख खाते पुरुषों के और 38% यानी 18.28 लाख महिलाओं के है। पुरुषों में कामकाजी और प्रवासी लोगों के खाते अधिक बताए गए हैं। महिलाओं का शादी के बाद पता बदलना या पीहर के पुराने खाते भूल जाना भी एक वजह है।

जयपुर-शेखावाटी में ज्यादा खाते

जयपुर के शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में ऐसे खातों की संख्या अधिक बताई गई है। इसके अलावा जोधपुर, उदयपुर, झुंझुनूं और सीकर में भी बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय हैं। शेखावाटी से बड़ी संख्या में लोगों के दूसरे राज्यों और विदेशों में रोजगार के लिए जाने से पुराने खातों के निष्क्रिय होने की बात सामने आती है।

टॉप-5 बैंक : सबसे ज्यादा ‘सोया धन’

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: 980 करोड़ रुपए
पंजाब नेशनल बैंक: 510 करोड़ रुपए
बैंक ऑफ बड़ौदा: 440 करोड़ रुपए
यूको बैंक: 280 करोड़ रुपए
एचडीएफसी बैंक: 195 करोड़ रुपए

बीते 5 वर्षों में लावारिस राशि का बढ़ता ग्राफ

वित्त वर्षकुल खातेकुल जमा राशि (करोड़ रुपए)RBI को ट्रांसफर (करोड़ रुपए)
2021-2231.10 लाख1,850.201,620.00
2022-2336.45 लाख2,210.601,980.50
2023-2441.20 लाख2,580.002,340.10
2024-2545.15 लाख2,890.302,610.80
2025-2648.12 लाख3,120.452,850.00

स्रोतः भारतीय रिजर्व बैंक की वर्ष 2025-26 की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट

ऐसे कर सकते हैं रकम के लिए दावा

बैंकिंग नियमों के तहत यदि किसी खाते में 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं हो तो बैंक जमा राशि को ब्याज सहित भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष (डीईए) में ट्रांसफर कर देते हैं। इस फंड का उपयोग वित्तीय साक्षरता अभियानों में किया जाता है। इस धन को कोई भी वैध वारिस या खाताधारक जरूरी दस्तावेजों दिखाकर ले सकता है।

Updated on:
18 Aug 2026 09:49 am
Published on:
18 Aug 2026 09:49 am