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Jaipur News: खातेदारों और जेडीए में टकराव, 300 मीटर सड़क उखाड़ने के मामले में दर्ज हुई FIR

खो नागोरियान को लूनियावास से जोड़ने वाली 160 फीट सड़क को लेकर निजी खातेदार और जेडीए आमने-सामने हो गए हैं। जेडीए ने यह सड़क करीब 10 वर्ष पुरानी बताते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ 300 मीटर तक उखाड़ने और राजकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
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गूगल इमेज में नजर आ रही सड़क। फोटो: पत्रिका

जयपुर। खो नागोरियान को लूनियावास से जोड़ने वाली 160 फीट सड़क को लेकर निजी खातेदार और जेडीए आमने-सामने हो गए हैं। जेडीए ने यह सड़क करीब 10 वर्ष पुरानी बताते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ 300 मीटर तक उखाड़ने और राजकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। जबकि खातेदारों का आरोप है कि उनकी पैतृक खातेदारी भूमि पर पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर ने सड़क बनवा दी। जिसका अब तक मुआवजा भी नहीं मिला। जेडीए मास्टर प्लान में यहां 160 फीट की सड़क प्रस्तावित है। लेकिन जमीन निजी खातेदारों की है।

जानकारी के मुताबिक, जेडीए अपीलीय अधिकरण जयपुर में भी यह मामला चल रहा है। बद्री सिंह व अन्य बनाम जेडीए मामले में खसरा संख्या 295, 267 और 298 ग्राम भावगढ़ बन्धया की भूमि को लेकर आदेश में संबंधित भूमि के किसी हिस्से से सड़क निकालने, निर्माण करने, भूमि से बेदखल करने, कब्जा करने, उपयोग करने या किसी भी प्रकार की दखलंदाजी नहीं करने की बात कही गई है। पटवारी खोनागोरियान ने 11 अगस्त की रिपोर्ट में माना कि 160 फीट रोड को करीब 100 फीट तक खोद दिया गया।

सड़क खसरा नंबर 295 और 298 में स्थित है। खसरा 295 की खातेदारी अजय सिंह, जय सिंह आदि और 298 की खातेदारी केदार सिंह, कंवर देवी आदि के नाम है। दूसरी ओर नगरीय विकास विभाग ने 160 फीट रोड के लिए सितंबर 2008 में जमीन अवाप्ति की अधिसूचना जारी की थी। इसमें खसरा संख्या 295, 298 और 267 भी शामिल थे। इसके बाद काश्तकारों ने 2017 में जेडीसी को पत्र लिखकर मुआवजे के स्थान पर 20 प्रतिशत आवासीय और 5 प्रतिशत व्यावसायिक भूखंड का आरक्षण पत्र जारी करने की मांग की थी।

गूगल मैप में गत वर्ष तक कच्चा रास्ता

गूगल की पुरानी सैटेलाइट इमेज जेडीए के दावे पर सवाल खड़े कर रही है। पत्रिका ने गूगल मैप से पड़ताल की तो संबंधित हिस्से की पिछले वर्ष तक की इमेज में कच्चा रास्ता ही नजर आ रहा है। जबकि मौजूदा समय में उसी जगह डामर की सड़क बनी दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सड़क बनी कब थी? जबकि जेडीए ने एफआईआर में डामर की सड़क को 10 साल पुरानी बताया हे।

इनका कहना है

“यह हमारी पैतृक जमीन है। पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम ने हमारी खातेदारी की भूमि पर सड़क बना ली और चुपचाप स्ट्रीट लाइट के पोल लगा दिए। हमारी जमीन 160 फीट रोड में है, लेकिन अब तक हमें मुआवजा नहीं मिला। हमने सड़क को उखाड़ा है।”
-बद्री सिंह राजावत

“यह छह किमी की सड़क है। मेरा इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है और न ही हमारी वहां कोई जमीन है। मुकदमा जेडीए ने दर्ज करवाया है। बेवजह मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं।”
-राजाराम गुर्जर

“अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। जेडीए ने करीब 10 वर्ष पहले सड़क बनाई थी। सड़क का कार्यादेश मेरे पास नहीं है। सड़क टुकड़ों में बनी है। उच्च अधिकारियों से इस बारे में बात करें।”
-अश्विनी अग्रवाल, जेईएन, जेडीए