
Rajasthan CM Bhajan Lal Sharma - File PIC
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के आगामी चुनावों को लेकर राज्य का सियासी और प्रशासनिक माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को सितंबर 2026 तक टालने के फैसले के साथ ही यह साफ हो गया है कि प्रदेश में 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के बजाय निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग समय पर आयोजित किए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग जहां जल्द ही 309 नगरीय निकायों के चुनावों की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है, वहीं पंचायत चुनावों की लॉटरी टलने पर विपक्ष और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश भर के स्थानीय नेताओं, महिला दावेदारों और आम जनता की नजरें अब आयोग के अगले आधिकारिक नोटिफिकेशन पर टिकी हुई हैं।
इधर, सरकार ने निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग कराने के पीछे प्रशासनिक और विकास कार्यों की निरंतरता का तर्क दिया है। वहीं दूसरी ओर, नगरीय निकायों में 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी सोमवार को पूरी होने के साथ ही चुनावी टिकट के दावेदारों के समीकरण बदल गए हैं और बीजेपी व कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपनी वार्डवार रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
राज्य सरकार के आधिकारिक पक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की घोषणा एक साथ की जाती, तो आचार संहिता पूरे प्रदेश में एक साथ लागू हो जाती।
सरकार के अनुसार, आचार संहिता एक साथ लागू होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्य, नई योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी तरह ठप हो जातीं।
प्रशासनिक तंत्र पर एक साथ दो बड़े चुनावों का दबाव कम करने और आम जनता के रोजमर्रा के कामों को प्रभावित होने से बचाने के लिए दोनों निकायों के चुनाव अलग-अलग कराने का फैसला किया गया है।
पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी प्रक्रिया अचानक रोके जाने पर पूर्व विधायक और याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा ने कड़ा ऐतराज जताया है। लोढ़ा के अनुसार, 'सरकार को 15 अगस्त से पहले पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी प्रक्रिया पूरी करनी थी और इस दिशा में काम भी चल रहा था, लेकिन अचानक प्रक्रिया को रोक दिया गया। पंचायती राज विभाग का यह कदम राजस्थान हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों की सीधे तौर पर अवमानना है। हम सरकार को विधिक नोटिस भेज रहे हैं और इसके तुरंत बाद हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे।'
चुनाव प्रक्रिया को लेकर पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने भी नीतिगत फैसलों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की अवधारणा पर चर्चा की जाती है और दूसरी तरफ दोनों चुनाव अलग-अलग आयोजित किए जा रहे हैं, जो स्पष्ट विरोधाभास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यदि नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम पहले घोषित कर दिए जाते हैं, तो उसका सीधा मनोवैज्ञानिक प्रभाव बाद में होने वाले पंचायत चुनाव के मतदाताओं पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भले ही चुनाव कार्यक्रम अलग-अलग घोषित हों, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऐसे किसी भी नए कार्य की अनुमति नहीं होती जो मतदाताओं को प्रभावित कर सके।
राज्य निर्वाचन आयोग के समन्वय से सोमवार को प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के कुल 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कर ली गई। इससे पहले 13 अगस्त 2026 को महापौर, नगर परिषद सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण का निर्धारण किया गया था।
वार्डों का आरक्षण तय होने से कई पुराने दावेदार अपनी सामान्य सीटें आरक्षित होने के कारण चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं। आरक्षित घोषित हुए वार्डों में संबंधित वर्गों और महिला उम्मीदवारों की सक्रियता अचानक बढ़ गई है।
जयपुर स्थित बीजेपी और कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालयों में वार्डवार योग्य प्रत्याशियों की सूची तैयार करने के लिए बैठकों का दौर शुरू हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों का कहना है कि पंचायत चुनावों के लिए लॉटरी निकालना राज्य सरकार का दायित्व है। लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होते ही 15 नवंबर 2026 से पूर्व सभी स्थानीय निकायों के चुनाव करा लिए जाएंगे।
Updated on:
18 Aug 2026 08:45 am
Published on:
18 Aug 2026 08:34 am
