जयपुर

Good News: भारतीय रेल की बड़ी सौगात, राजस्थान में यहां 470 करोड़ की योजना से रेलखंड होगा डबल ट्रैक

Indian Railways: 470 करोड़ रुपए की परियोजना से बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार और माल ढुलाई क्षमता। तीर्थ, उद्योग और स्थानीय कारोबार को मिलेगा नया संबल।
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Feb 15, 2026
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Ringas Sikar Railway Line: जयपुर। प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ी पहल करते हुए भारतीय रेल ने राजस्थान के रींगस–सीकर रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। 470.34 करोड़ रुपये की लागत से 50.06 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक को डबल लाइन में बदला जाएगा। इससे न केवल परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को तेज, सुरक्षित और समयबद्ध रेल सेवा भी मिल सकेगी।

वर्तमान में क्षमता का 77 प्रतिशत उपयोग

उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत आने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वर्तमान में क्षमता का 77 प्रतिशत उपयोग हो रहा है, जो अगले कुछ वर्षों में 200 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। ऐसे में दोहरीकरण भविष्य की यातायात मांग को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में पांच अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन संभव होगा, जिससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे।

रींगस–सीकर रेलखंड दोहरीकरण : परियोजना विवरण

क्रमांकविवरणजानकारी
1परियोजना का नामरींगस–सीकर रेलखंड दोहरीकरण
2कुल लागत470.34 करोड़ रुपये
3कुल लंबाई50.06 किलोमीटर
4रेलवे जोनउत्तर पश्चिम रेलवे
5अतिरिक्त ट्रेन संचालनप्रतिदिन 5 ट्रेनें
6माल ढुलाई क्षमता वृद्धि2.36 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष
7वर्तमान क्षमता उपयोग77 प्रतिशत
8भविष्य अनुमान200% से अधिक यातायात क्षमता
9प्रमुख लाभार्थी क्षेत्ररींगस, सीकर व आसपास का इलाका
10प्रमुख उद्देश्यतेज, सुरक्षित और समयबद्ध रेल सेवा

क्षेत्र को संभावित लाभ

क्रमांकलाभप्रभाव
1यात्रा समय में कमीतेज और समय पर ट्रेन संचालन
2पर्यटन को बढ़ावाखाटू श्यामजी व सालासर बालाजी पहुंच आसान
3व्यापार वृद्धिमाल ढुलाई तेज, लागत कम
4स्थानीय उद्योग सशक्तबाजार से बेहतर कनेक्टिविटी
5रोजगार के अवसरनिर्माण व संचालन में नई नौकरियां
6आर्थिक विकासक्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति

माल ढुलाई में भी बड़ा इजाफा

माल ढुलाई में भी बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा। अनुमान है कि करीब 2.36 मीट्रिक टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल परिवहन संभव होगा, जिससे उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यह रेलखंड धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे खाटू श्यामजी मंदिर और सालासर बालाजी मंदिर जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों तक पहुंचना अधिक आसान हो जाएगा।

ट्रेनों की समयपालन क्षमता सुधरेगी

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से देरी में कमी आएगी, ट्रेनों की समयपालन क्षमता सुधरेगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। स्थानीय रोजगार, व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

Updated on:
15 Feb 2026 09:53 am
Published on:
15 Feb 2026 09:53 am