जयपुर

जयपुर में डवलप हो रहा नया कल्चर…सेकेंड होम बन रहे शुद्ध जीवन का भरोसा

बदलती जीवनशैली और बढ़ती मिलावट के बीच जयपुर में एक शांत लेकिन गहरा बदलाव आकार ले रहा है। शहर के आउटर इलाकों में सेकेंड होम अब केवल वीकेंड बिताने की जगह नहीं रहे, बल्कि शुद्ध भोजन, प्राकृतिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी का ठोस मॉडल बनते जा रहे हैं।

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Jan 19, 2026

जयपुर. सेकेंड होम जयपुर में अब सिर्फ वीकेंड बिताने की जगह नहीं रहे। मिलावट और बदलती जीवनशैली के बीच ये फॉर्म हाउस शुद्ध भोजन, प्राकृतिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी का नया मॉडल बन रहे हैं।बदलती जीवनशैली और बढ़ती मिलावट के बीच जयपुर में एक शांत लेकिन गहरा बदलाव आकार ले रहा है। शहर के आउटर इलाकों में सेकेंड होम अब केवल वीकेंड बिताने की जगह नहीं रहे, बल्कि शुद्ध भोजन, प्राकृतिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी का ठोस मॉडल बनते जा रहे हैं।

आमेर, सिरसी, जगतपुरा, कालवाड़ रोड, अजमेर रोड और टोंक रोड जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शहरवासी अपने सेकेंड होम को फॉर्म हाउस का रूप दे रहे हैं। यहां सब्जियां उगाई जा रही हैं। गाय-भैंस पाली जा रही हैं और इनकी देखभाल करने के लिए एक परिवार को स्थायी रूप से रोजगार भी दे रहे हैं।

खुद के लिए उगा रहे सब्जियां
इन फॉर्म हाउसों में रासायनिक खेती से दूरी बनाकर जैविक तरीकों को अपनाया जा रहा है। टमाटर, भिंडी, लौकी, तोरई, पालक से लेकर मौसमी साग-सब्जियां सीधे खेत से रसोई तक पहुंच रही हैं। पशुपालन से शुद्ध दूध, दही और घी उपलब्ध हो रहा है। इससे बाजार पर निर्भरता कम हुई है और लोगों को अपने खानपान पर भरोसा लौटता दिख रहा है।

मिलावट से मुक्ति की तलाश
मिलावटी दूध और सब्जियों की खबरों ने उन शहरवासियों को सोचने पर मजबूर किया जिनके पास पर्याप्त जगह थी। ऐसे ही लोगों ने समाधान निकाला और सेकेंड होम पर खेती करना शुरू कर दिया। सेकेंड होम न केवल शुद्ध सब्जियां दे रहे हैं, बल्कि मानसिक सुकून भी मिलता है। वीकेंड पर परिवार के लोग यहां पहुंचकर मोबाइल और ट्रैफिक से दूर, प्रकृति के करीब समय बिताते हैं।

रोजगार और सेहत को साथ जोड़ता नया शहरी ट्रेंड
इस बदलाव का सामाजिक पक्ष भी उतना ही अहम है। अधिकांश फॉर्म हाउसों पर एक स्थानीय परिवार को देखभाल, खेती और पशुपालन के लिए रखा गया है। इससे आसपास के गांवों में स्थायी रोजगार सृजित हो रहा है। कई जगहों पर रहने की सुविधा, बिजली-पानी और ब‘चों की पढ़ाई तक की व्यवस्था की गई है। इन परिवारों को 10 से 12 हजार रुपए तक मासिक दिए जाते हैं।

सभी आकर बिताते समय
कई वर्ष पहले निवेश के हिसाब से प्लॉट खरीदा था। जब शुद्ध दूध और सब्जियों की जरूरत महसूस होने लगी तो यहां काम शुरू कर दिया। साथ ही दूध के लिए गाय लेकर आए। कुछ कमरे भी बनवाए हैं। परिवार और रिश्तेदार कभी कभी यहां आकर समय बिताते हैं।
-हनुमान सिंह शक्तावत, जगतपुरा

खूब मिल रहा दूध-घी
घर से करीब 25 किमी दूर फॉर्म हाउस कुछ वर्ष पहले विकसित किया। वहां पर अनाज के साथ सब्जी होती है। दूध के लिए गाय भी हैं। दूध के साथ पर्याप्त मात्रा में घी भी परिवार और रिश्तेदारों तक पहुंचता है।
-विक्की बंसल, वैशाली नगर

Published on:
19 Jan 2026 05:23 pm
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