जयपुर

7 माह के बच्चे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए चिकित्सक ने मांगी 10 हजार की रिश्वत, एसीबी ने दबोचा

चिकित्सक डॉ. बी.एल.मीणा ने 10 हजार रुपए मांगे, 8 हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़ा
2 min read
Oct 27, 2017
ACB Trap

जयपुर . दुनिया में आने से पहले जिस बच्चे की मां के गर्भ में ही मौत हो गई, उसी बच्चे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए एक चिकित्सक ने इंसानियत को ताक पर दिया। मां के गर्भ में 7 माह तक पले—बढ़े बच्चे की मौत पर उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए सेठी कॉलोनी स्थिति सेटेलाइट अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बी.एल. मीणा ने पीडि़त पिता से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग ली। बच्चे को खोने वाले पिता ने मीणा से कई बार गुहार की लेकिन उनका रिश्वतखोर दिल नहीं पसीजा। रुआंसे पिता बृज कुमार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पहुंचा। ऐसे झकझोर देने वाले घटनाक्रम को सुन एसीबी अधिकारी भी तत्काल सक्रिय हो गए।

पीडि़त राशि लेकर पहुंचा तो एसीबी टीम ने चिकित्सक को रंगे हाथ गिरफ्तार कर दिया। आरोपित चिकित्सक को 8 हजार रुपए रिश्वत राशि बरामद की गई। एसीबी के सीआई राम सिंह ने बताया कि परिवादी बृज कुमार ने 25 अक्टूबर को शिकायत की थी, जिसका सत्यापन कर चिकित्सक को ट्रेप किया गया। डॉ. मीणा सेटेलाइट अस्पताल में प्रमुख विशेषज्ञ, फोरेंसिक मेडिसन के पद पर कार्यरत है।

सड़क दुर्घटना में घायल हुई मां, बच्चा नहीं बच पाया
पीडि़त पावटा निवासी है। 24 अक्टूबर को परिवादी बृज कुमार व उसकी पत्नी सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। पावटा से प्रथमिक उपचार के बाद बृज कुमार पत्नी को जयपुर स्थित महिला चिकित्सालय ले आया। यहां उसके गर्भ में पल रहे 7 महीने के बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई थी। पीडि़त को क्लेम लेने के लिए बच्चे का पोस्टमार्टम कराना जरूरी था। इसलिए वह सेठी कॉलोनी स्थित एसआर गोयल अस्पताल (सेटेलाइट) में पहुंचा। यहां डॉ.बी.एल. मीणा ने बच्चे का पोस्टर्माटम कर दिया और इसके बाद रिश्वतखोरी का खेल शुरू हुआ।

दो रिपोर्ट : एक से मिलेगा मुआवजा, दूसरी से नहीं
डॉ. मीणा ने 25 अक्टूबर को पीडि़त के भाई को फोन कर बृज कुमार को रिपोर्ट लेने के लिए अस्पताल बुलाया। पीडि़त अगले दिन पहुंचा तो मीणा ने दो अलग—अलग रिपोर्ट तैयार करने का हवाला दिया। उसने कहा एक रिपोर्ट बिना क्लेम की होगी और दूसरी से मुआवजा मिल जाएगा। इस पर पीडि़त से फिर पूछा की बता कौनसी रिपोर्ट चाहिए। परेशान पीडि़त ने क्लेम वाली रिपोर्ट के लिए कहा तो चिकित्सक ने 10 हजार रुपए की मांग कर डाली। राशि नहीं देने पर दूसरी रिपोर्ट देने की बात कही। इस पर पीडि़त ने अपने रिश्तेदार—परिजन को बात बताई। उनमें से एक ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद उसने एसीबी अधिकारियों को जानकारी दी। चिकित्सक के पास गया तो 8 हजार रुपए पर बात तय हुई।

Published on:
27 Oct 2017 08:19 pm
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