Rajasthan: परिवार नियोजन के तमाम आधुनिक साधन मौजूद होने के बाद भी शादीशुदा महिलाएं नसबंदी करवाने को मजबूर है। जानें क्यों.. ?
अरुण कुमार। विज्ञान और आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस (एआई) के दौर में जहां परिवार नियोजन के तमाम आधुनिक साधन मौजूद हैं देश में 38 फीसदी विवाहिताएं नसबंदी के लिए मजबूर हैं। खास बात है कि केंद्र और राज्य सरकारें परिवार नियोजन के तमाम नि:शुल्क साधन भी उपलब्ध करवा रही हैं। इसके बावजूद पुरुषों के मुकाबले महिला नसबंदी 126 गुना ज्यादा है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कुल विवाहितों में 0.3 फीसदी पुरुष नसबंदी करवा रहे हैं। पुरुष नसबंदी सहित सभी आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों को मिला लें तो भी वे महिला नसबंदी के मुकाबले आधे भी नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के अनुसार दुनिया भर में 25 करोड़ से ज्यादा महिलाएं ऐसी हैं जो गर्भवती नहीं होना चाहती लेकिन मजबूरन गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। वहीं, 17.2 करोड़ लोग ऐसे हैं जो किसी भी तरह के गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना ही नहीं चाहते हैं।
आंध्रप्रदेश में 70 फीसदी और तेलंगाना में 62 फीसदी दंपतियों में महिला नसबंदी अपनाई जा रही है। मध्य प्रदेश 52 प्रतिशत और राजस्थान 42.1 प्रतिशत के साथ राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा हैं। बिहार में 35 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी करवा रही हैं जबकि झारखंड में 37 फीसदी। उत्तर-पूर्व के राज्यों में यह तुलनात्मक रूप से कम है।
सिर्फ नसबंदी जैसे विकल्प पर इतनी निर्भरता ठीक नहीं है। यह सोचने की बात है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसा विकल्प क्यों अपना रही हैं जो स्थायी है? जबकि पिछले कई दशकों में तमाम सुरक्षित और सरल उपाय भी आ गए हैं, जिनका उपयोग रोक कर दुबारा गर्भधारण किया जा सकता है। - डॉ. जयदीप टांक, अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनाकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया
देश में कुल दंपतियों में 56 फीसदी आधुनिक गर्भनिरोधक का उपयोग करते हैं। वहीं, कुल आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों को अपनाने वालों में 67 प्रतिशत हिस्सा अकेले महिला नसबंदी का है। जबकि यह स्थायी निरोधक उपाय है जिसे सिर्फ अधिक उम्र में ही अपनाने की सलाह दी जाती है।
राजस्थान विधानसभा में पेश प्रगति प्रतिवेदन के अनुसार, राज्य में 2023 में जहां एक लाख 60 हजार महिलाओं ने नसबंदी करवाई। वहीं, पुरुषों में यह संख्या 1267 रही। पूर्व के वर्षों में यह आंकड़ा ज्यादा था। इसी प्रकार दो बच्चों के बाद 85 हजार से ज्यादा महिलाओं ने नसबंदी करवाई जबकि इस मामले में पुरुषों की संख्या 924 रही।
वहीं, एनएफएचएस के आंकड़ों के अुनसार राजस्थान में 15-49 वर्ष विवाहित महिलाओं में से 57.9 फीसदी ने गर्भनिरोधक की आधुनिक विधि का उपयोग किया।