AI impact on brain: सिर्फ 10 मिनट के इस्तेमाल से कमजोर हो रही स्वतंत्र सोच और हार न मानने की क्षमता।
AI reduces persistence: जयपुर. आज हम हर छोटी समस्या का हल AI से पूछ लेते हैं। काम फटाफट हो जाता है, जवाब तुरंत मिल जाता है। लेकिन एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि ये सुविधा हमारे दिमाग को चुपके-चुपके नुकसान पहुंचा रही है। अमरीका और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं की ओर से की गई इस रिसर्च में 1,222 लोगों पर परीक्षण किया गया। कुछ ने गणित और समझ वाले सवालों में AI की मदद दी गई, कुछ ने नहीं।
AI की मदद लेने वाले लोग शुरू में बहुत तेजी और सटीकता से सवाल हल कर रहे थे। लेकिन जैसे ही AI हटा दिया गया और उन्हें खुद सोचना पड़ा, उनका प्रदर्शन पहले से भी खराब हो गया। वे जल्दी हार मानने लगे, समस्या पर टिके रहने की क्षमता काफी कम हो गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये नकारात्मक असर सिर्फ 10-15 मिनट के AI इस्तेमाल के बाद दिखने लगा। महीनों की आदत की जरूरत नहीं पड़ी। शोधकर्ताओं ने इसे “heavy cognitive cost” यानी दिमाग पर भारी कीमत बताया।
AI हमें बिना मेहनत के जवाब दे देता है। इससे दिमाग की वो “मांसपेशियां” कमजोर पड़ जाती हैं जो संघर्ष, गलती करने और बार-बार कोशिश करने से मजबूत होती हैं। नतीजा — स्वतंत्र सोचने, गहरे विश्लेषण और धैर्य से समस्या सुलझाने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। शोधकर्ता Rachit Dubey का कहना है कि AI का इस्तेमाल हमें “फ्रिक्शनलेस थिंकिंग” की आदत डाल देता है, जिसकी लंबे समय में भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
AI को टूल की तरह इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन हर छोटी-छोटी चीज में उस पर निर्भर हो जाना खतरनाक है। धीरे-धीरे हम अपनी सोचने की क्षमता खोते जा रहे हैं। हम अपनी दिमाग की ताकत बचाना चाहते हैं, तो AI को सिर्फ सहारा नहीं, बल्कि समझ बढ़ाने का माध्यम बनाना होगा।