
AI in Education: जयपुर/नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब शिक्षा क्षेत्र में भी दस्तक दे चुका है। अमरीका के एक स्कूल ने पारंपरिक शिक्षकों की जगह AI को मुख्य विषय पढ़ाने का जिम्मा सौंप दिया है। इस स्कूल में बच्चे अब रोजाना दो घंटे कोर एकेडमिक विषय AI ट्यूटर से सीखेंगे। बाकी समय में AI ही वर्कशॉप, यूनिक प्रोजेक्ट्स और जीवन कौशल सिखाने का काम करेगा।
अल्फा स्कूल पिछले साल नवंबर में AI-पावर्ड मॉडल शुरू करने की घोषणा कर चुका था। अब यह मॉडल व्यावहारिक रूप से लागू हो गया है। स्कूल में पारंपरिक किताबें और होमवर्क की जगह खान अकेडमी, मेमबीन, मेंटावा और मोबीमैक्स जैसे थर्ड-पार्टी एजुकेशनल ऐप्स का इस्तेमाल किया जाएगा। कोर्स डिजाइन से लेकर डेली प्रोग्रेस ट्रैकिंग तक सब कुछ AI के नियंत्रण में होगा।
स्कूल प्रशासन का कहना है कि AI व्यक्तिगत रूप से हर छात्र की गति और समझ के अनुसार पढ़ाई कराएगा, जिससे सीखने की प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी होगी। हालांकि, पूरी तरह शिक्षकों को हटाने की बजाय उन्हें ‘ह्यूमन गाइड’ के रूप में रखा गया है। ये गाइड छात्रों को मोटिवेट करने, वर्कशॉप कराने और विशेष कौशल सिखाने का काम करेंगे।
AI के इस कदम से शिक्षा क्षेत्र में नौकरियों के कटौती का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कई सेक्टरों की तरह शिक्षा में भी AI लाखों नौकरियां प्रभावित कर सकता है। जहां एक ओर काम के तरीके तेज और आसान हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक शिक्षकों की भूमिका सीमित हो सकती है। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि AI भावनात्मक जुड़ाव, नैतिक मूल्य सिखाने और क्लासरूम मैनेजमेंट जैसे कामों में इंसानी टीचर की जगह नहीं ले सकता। फिर भी, कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 2026 में AI शिक्षा को पूरी तरह बदलने वाला है।
इस मॉडल के समर्थक कहते हैं कि AI से हर बच्चे को व्यक्तिगत ध्यान मिलेगा और टीचर्स का वर्कलोड कम होगा। लेकिन आलोचक चिंता जता रहे हैं कि भावनात्मक समर्थन और समस्या समाधान की क्षमता AI में सीमित है। भारत जैसे देशों में जहां लाखों शिक्षक परिवार चलाते हैं, ऐसे बदलाव को सावधानी से लागू करने की जरूरत है।शिक्षाविदों का सुझाव है कि AI को टीचर की जगह नहीं, बल्कि सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जाए। भविष्य में शिक्षक और AI का संयोजन ही शिक्षा को बेहतर बना सकता है।
राजस्थान AI-ML Policy 2026 में भी स्कूलों में AI शिक्षा को बढ़ावा देने की बात है, लेकिन सरकार का फोकस “AI for teachers, not instead of teachers” पर है। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में हजारों शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। ऐसी स्थिति में AI को शिक्षा में शामिल करने की पहल तेज हो गई है। राजस्थान सरकार पहले से ही AI-powered tools का इस्तेमाल कर रही है, जो 65,000 सरकारी स्कूलों में 3.8 मिलियन छात्रों तक पहुंच चुके हैं। पिछले दिनों मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि AI का thoughtful integration सरकारी स्कूलों में foundational learning को मजबूत कर सकता है। राजस्थान में AI-based competency assessment पहले ही 25 लाख से ज्यादा छात्रों पर लागू हो चुका है। साथ ही Sampark AI Rajasthan Impact Summit 2026 में AI को टीचर की जगह नहीं, बल्कि सपोर्टर के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।
Published on:
17 Apr 2026 02:31 pm
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