
मासूम से अस्पताल में मिलते कलक्टर। फोटो- पत्रिका
जयपुर। छह वर्षीय प्रतिका की दर्दभरी कहानी पत्रिका में प्रकाशित होने के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया। शनिवार को जिला कलक्टर संदेश नायक खुद जेकेलोन अस्पताल पहुंचे और बच्ची से मुलाकात कर उसके हालात की जानकारी ली। इतना ही नहीं आधार कार्ड नहीं बनने की समस्या के समाधान के लिए डीओआईटी की टीम को भी साथ लेकर पहुंचे, जहां अस्पताल के वार्ड में ही आधार आवेदन की प्रक्रिया शुरू करवाई गई। वहीं एक निजी स्कूल ने भी मानवीय पहल करते हुए प्रतिका को 12वीं कक्षा तक निशुल्क शिक्षा देने का अनुमति पत्र परिजनों को सौंप दिया।
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बता दें कि प्रतिका की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। जन्म के समय ही उसने अपनी मां सुमन को खो दिया था। पिता रवि के सहारे जीवन आगे बढ़ रहा था, लेकिन करीब डेढ़ वर्ष पहले एक सड़क हादसे में उनका भी निधन हो गया। साढ़े चार वर्ष की उम्र में अनाथ हुई प्रतिका पर इसके बाद एक और बड़ा संकट आ गया। उसे लकवे ने जकड़ लिया, जिससे उसके शरीर का एक हिस्सा प्रभावित हो गया और उसकी बोलने की क्षमता भी प्रभावित हुई।
इन कठिन परिस्थितियों के बीच परिवार के लोग बच्ची का आधार कार्ड बनवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। परिजनों के अनुसार सात बार आवेदन करने के बावजूद आधार कार्ड नहीं बन सका। हर बार मृत माता-पिता के बायोमेट्रिक की मांग की जाती रही, जिसके कारण आवेदन निरस्त हो जाते थे। आधार कार्ड नहीं होने से जनाधार कार्ड भी नहीं बन पा रहा था और इसका असर इलाज, शिक्षा तथा अन्य सरकारी सुविधाओं पर पड़ रहा था।
वर्तमान में प्रतिका का इलाज जयपुर के जेकेलोन अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सक लगातार उसकी मदद कर रहे हैं, लेकिन कई प्रक्रियाओं में पहचान संबंधी दस्तावेजों की कमी बड़ी बाधा बनी हुई थी। समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हुई त्वरित कार्रवाई से अब प्रतिका को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। आधार कार्ड की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही उसके लिए शिक्षा का रास्ता भी आसान हुआ है। परिजनों का कहना है कि यह मदद बच्ची के भविष्य के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।
Updated on:
6 Jun 2026, 3:29 PM IST
Published on:
6 Jun 2026, 3:24 PM IST
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