एलपीजी की किल्लत और कालाबाजारी ने आम आदमी का बजट और रसोई का जायका बिगाड़ दिया है।
जयपुर। एलपीजी की किल्लत और कालाबाजारी ने आम आदमी का बजट और रसोई का जायका बिगाड़ दिया है। विभागीय रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासों ने सिस्टम की लापरवाही की पूरी पोल खोल कर रख दी है। आंकड़ों की मानें तो प्रदेश में गैस एजेंसियां और डीलर मिलीभगत कर उपभोक्ताओं के हक के सिलेंडर खुलेआम 'ब्लैक' में बेच रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में 7 हजार से ज्यादा ऐसी शिकायतें मिली हैं जहां उपभोक्ताओं की बुकिंग ही नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि कई दिनों तक इंतजार करने के बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंच रहा। इस संकट को और गहरा कर दिया है गैस कंपनियों के 'ठप' पड़े सर्वर ने। ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है, जिससे डिजिटल इंडिया का दावा करने वाली कंपनियों की साख पर बट्टा लग रहा है। कई जिलों में तो पूरे-पूरे दिन सर्वर डाउन रहने से लोग अपनी बारी का इंतजार ही करते रह जाते हैं।
कालाबाजारी के मामले में राजधानी जयपुर प्रदेश के बाकी जिलों को पछाड़कर नंबर 1 पर आ गई है। प्रदेशभर में कालाबाजारी की कुल 1200 शिकायतों में से अकेले जयपुर में 320 मामले दर्ज हुए हैं। यानी कुल शिकायतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा केवल राजधानी से है। जयपुर के बाद सीकर (120 शिकायतें) और झुंझुनूं (88 शिकायतें) का नंबर आता है। उपभोक्ता संगठनों का आरोप है कि गैस एजेंसियां तय रेट से कहीं ज्यादा दाम वसूल रही हैं और विरोध करने पर स्टॉक न होने का बहाना बना दिया जाता है।
हैरानी की बात यह है कि विभाग और पुलिस द्वारा समय-समय पर छापेमारी और सख्त कार्रवाई के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर इसका कोई असर नजर नहीं आ रहा। रसूखदार डीलरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रहती है। अधिकारियों की चुप्पी इस कालाबाजारी के खेल में उनकी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।
प्रदेश में वर्तमान में शादियों का सीजन चल रहा है, ऐसे में सिलेंडर न मिलने से लोगों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। कई ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में महिलाएं एक बार फिर लकड़ी और पारंपरिक चूल्हों पर खाना पकाने को मजबूर हैं। सरकार पर अब चौतरफा दबाव है कि वे बुकिंग सिस्टम को दुरुस्त करें और दोषियों के लाइसेंस रद्द कर आम जनता को राहत पहुंचाएं।