जयपुर

एंकर : सवालों के जवाब जीवन का हिस्सा बनें : जिनमणिप्रभसूरीश्वर

Aug 09, 2026
Rajasthan

Bहैदराबाद.B त्रयनगर स्थित कारवान दादावाड़ी में खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभसूरीश्वर ने शनिवार को चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि जीवन में उठने वाले सवालों के उत्तर केवल जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि वे हमारे जीवन का हिस्सा बनें। जिज्ञासाएं तभी सार्थक हैं जब वे जीवन में परिवर्तनकारी स्थिति उत्पन्न करें।
पूजा के वस्त्रों में सामायिक करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि वस्त्र पवित्रता का प्रतीक हैं और भावशुद्धि ही मूल आधार है। सामायिक पूजा के वस्त्रों में की जा सकती है, बशर्ते वे अपवित्र न हों। महिलाओं द्वारा ‘नमो सिद्धाचार्योपाध्याय सर्वसाधुभ्यः’ न बोलने की परंपरा पर उन्होंने सिद्धसेन दिवाकर आचार्य का प्रसंग सुनाया और बताया कि परमात्मा की वाणी को रूपांतरित करना अपराध माना गया था, जिसके प्रायश्चित स्वरूप उन्हें बारह वर्ष तक साधु-वेश का त्याग करना पड़ा।

सामायिक विधि पर उन्होंने कहा कि मूल सूत्र समान हैं, पर परंपरा अनुसार अंतर होता है। खरतरगच्छ में तीन बार ‘करेमि भंते’ बोला जाता है, जबकि तपागच्छ में एक बार। अभिग्रह का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह दृढ़ संकल्प है जिसमें कोई समझौता नहीं होता। भगवान महावीर ने तेरह बोल का अभिग्रह लिया था और अधूरा रहने पर भी समझौता नहीं किया।

प्रवचन के अंत में उन्होंने कहा कि परमात्मा की वाणी के कुछ शब्द भी अगर जीवन में उतार लिए जाएं तो जीवन बदल सकता है।

मुनि विरक्तप्रभसागर ने बताया कि आगामी रविवार को “ जेन जी - द आर्ट ऑफ अनप्लगिंग : फाइंडिंग इन्नर पीस बियॉन्ड द सीन ” विषय पर विशेष प्रवचन होगा। साथ ही बच्चों के लिए अष्टप्रकारी पूजा प्रशिक्षण, बाल संस्कार शिविर और युवाओं के लिए “भक्ति सरगम” प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। श्रद्धालुओं से अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान किया गया।

Updated on:
09 Aug 2026 06:02 am
Published on:
09 Aug 2026 06:02 am