
Ashok Gehlot News : जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली, चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद और प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में हुई अनियमितताओं को लेकर केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। 49 सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि देश में निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है और चुनाव आयोग केंद्र सरकार के एक विभाग की तरह काम कर रहा है।
गहलोत ने राजस्थान में हाल में हुए नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए परिसीमन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह वार्डों का पुनर्गठन इस तरह किया गया, जिससे सत्तारूढ़ दल को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि जयपुर और जोधपुर समेत कई जगह कांग्रेस वोटों की संख्या में आगे रही, लेकिन सीटों के परिणाम अलग रहे।
राजस्थान के निकाय चुनावों के दौरान सामने आए विवादों को लेकर गहलोत ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाया गया और कुछ अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में काम किया। गहलोत ने कहा कि राजस्थान के इतिहास में चुनावों के दौरान ऐसी घटनाएं पहले नहीं हुईं। उन्होंने निर्दलीय विधायक के लापता होने, पार्षदों को दूसरे राज्यों में ले जाने और अदालतों के समय को लेकर उठे सवालों का जिक्र करते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस का भी इस्तेमाल किया गया।
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं ऐसी उम्मीद नहीं करता था। मैंने कहा था कि ये भले आदमी हैं। ये भला आदमी ऐसा निकला है कि मैं सोच नहीं सकता था कि इस प्रकार के चुनाव करवाकर राजस्थान को बर्बाद कर देंगे। ऐसी क्या जल्दी थी चुनाव जीतने की? कमाल है। आपने क्या-क्या नहीं किया।
जोधपुर, जयपुर और कोटा के निकाय चुनाव परिणामों को लेकर गहलोत ने कहा कि 25 सितंबर को तस्वीर साफ होगी। उन्होंने चुनाव के दौरान हॉर्स ट्रेडिंग, पैसों के इस्तेमाल, धमकियों और पुराने मामलों को दोबारा खोलने जैसे आरोप भी लगाए। गहलोत ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए इस तरह के तौर-तरीके लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दलों को इन घटनाओं के खिलाफ मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
गहलोत ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से यह कहना कि उन्हें फैसलों की जानकारी नहीं दी जाती और उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता, गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर पहले से संदेह था। उन्होंने कहा, इसको इमीडिएटली बर्खास्त करना चाहिए। गहलोत ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को अलग करने के लिए नया कानून बनाया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के मन में सवाल खड़े हुए हैं। उनके मुताबिक, कई लोग अब बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। गहलोत ने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कोविड-19, SIR, 'वोट चोरी' और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। गहलोत के मुताबिक, अब चुनाव आयोग के दो सदस्यों की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद इन मुद्दों पर बहस और तेज हो गई है।