
Rajasthan politics: जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छात्रसंघ चुनावों को लेकर राजस्थान की भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोडऩे और भविष्य के नेता तैयार करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन वर्तमान सरकार इसकी महत्ता को नजरअंदाज कर रही है।
गहलोत ने सोशल मीडिया पर साझा किए अपने बयान में कहा कि एनएसयूआई समेत राज्य के सभी छात्र संगठन छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। जब सभी संगठन चुनाव चाहते हैं, तो सरकार को इसमें क्या परेशानी है?
उन्होंने बताया कि भाजपा की पिछली सरकार (2003-2008) के कार्यकाल में छात्रसंघ चुनावों को रोक दिया गया था, जिसे 2010 में कांग्रेस सरकार ने दोबारा शुरू किया। कोविड महामारी के कारण 2020 में चुनाव स्थगित किए गए थे, लेकिन 2022 में कांग्रेस शासन में फिर से बहाल किए गए।
गहलोत ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद छात्रसंघ चुनाव फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं। जबकि चुनाव आयोग द्वारा कॉलेज अधिग्रहण और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के कारण 2023 में केवल कुछ महीनों के लिए इन्हें टाला गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से आग्रह किया है कि वह छात्र संगठनों की मांग को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द छात्रसंघ चुनावों की घोषणा करे, ताकि प्रदेश के युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी के अपने अधिकार से वंचित न रहें।