पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सत्तारूढ़ भजनलाल सरकार के बीच 'डिजिटल वॉर' लगातार तेज होता जा रहा है। गहलोत की चर्चित सोशल मीडिया सीरीज 'इंतजारशास्त्र' का कारवां अब चैप्टर-14 तक पहुँच गया है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सीरीज 'इंतजारशास्त्र' के माध्यम से भाजपा सरकार की घेराबंदी जारी रखी है। रविवार 5 अप्रैल को जारी 'चैप्टर-14' में उन्होंने जोधपुर में निर्माणाधीन 'राजीव गांधी फिनटेक डिजिटल इंस्टीट्यूट' के काम में हो रही देरी को मुद्दा बनाया है। गहलोत का आरोप है कि यह संस्थान राजस्थान के युवाओं को AI और साइबर सिक्योरिटी जैसी आधुनिक तकनीकों में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देने के लिए मील का पत्थर साबित होना था, लेकिन वर्तमान सरकार की 'राजनीतिक द्वेष' की भावना ने इसे अधर में लटका दिया है।
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में कहा कि जिस संस्थान का काम मार्च 2024 तक पूरा होकर युवाओं के लिए खुल जाना चाहिए था, वह आज भाजपा सरकार की उदासीनता के कारण अधूरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस संकल्प के साथ इसकी नींव रखी थी कि राजस्थान का युवा दुनिया की बदलती तकनीक (AI, डेटा एनालिटिक्स) के साथ कदम से कदम मिला सके।
गहलोत ने इस प्रोजेक्ट के अटकने के पीछे फंड की कमी का बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि:
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधा सवाल किया है, 'आखिर भाजपा को प्रदेश की प्रगति और युवाओं के कौशल विकास से क्या आपत्ति है?' उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन जनहित की परियोजनाओं को रोकना प्रदेश को पीछे धकेलने जैसा है। गहलोत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस 'इंतजार' को तुरंत खत्म कर संस्थान का काम पूरा करवाया जाना चाहिए।
जोधपुर का यह फिनटेक इंस्टीट्यूट केवल एक इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान को 'डिजिटल हब' बनाने का एक सपना है। गहलोत के अनुसार, यहाँ युवाओं को AI, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक विषयों में ट्रेनिंग मिलनी थी। देरी के कारण हजारों छात्र इन अवसरों से वंचित रह रहे हैं।
'इंतजारशास्त्र' सीरीज के हर नए चैप्टर के साथ जनता के बीच चर्चा तेज हो रही है। जोधपुर के युवाओं और आईटी सेक्टर से जुड़े लोगों ने भी इस प्रोजेक्ट की सुस्त रफ्तार पर चिंता जताई है। विपक्ष इसे सरकार की 'विफलता' के रूप में पेश कर रहा है, वहीं सरकार की ओर से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।